विकास की सरस्वती ऐसे तो नहीं दिखती

विकास की सरस्वती ऐसे तो नहीं दिखती

राजनीतिक दुनिया भी अजीब है। यहां दोस्ती और दुश्मनी का कोई स्थायी भाव नहीं होता। पल में तोला-पल में मासा वाले हालात होते हैं। सपा और कांग्रेस के गठबंधन को इसी रूप में देखा जा सकता है। राहुल गांधी ने इस गठबंधन को गंगा-यमुना का मिलन कहा है,वहीं अखिलेश यादव ने साइकिल के पहिए के रूप में इसे देखने की व्यंजना की है। राहुल गांधी ने यह विश्वास जाहिर किया है कि इस संगम से…

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इस्लामिक आतंकवाद पर टंप कार्ड

इस्लामिक आतंकवाद पर टंप कार्ड

प्रभुनाथ शुक्ल अमेरीकी राष्टपति डोनाल्ट टंप की जीत के बाद यह साफ हो गया था कि इस्लामिक आतंकवाद पर उनका नजरिया बेहद सख्त है। संभवतः उनकी जीत के पीछे यह सबसे बड़ा छुपा राज था, जिसे हिलेरी और उनके समर्थक नहीं पढ़ पाए। राष्टपति पद की कमान संभालने के बाद से ही उन्होंने आतंकवाद पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। इसके पूर्व उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रुसी राष्टपति ब्लादीमिर पुतिन और चीन को भी…

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ओबामा का आत्मविश्लेषण

ओबामा का आत्मविश्लेषण

डा. दिलीप अग्निहोत्री अमेरिकी राष्ट्रपति का विदाई भाषण आत्मविश्लेषण की भांति होता है। इस प्रकार से वह अपना रिपोर्ट कार्ड जारी करता है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने गृहप्रान्त शिकागों में विदाई भाषण दिया। दो साल का कार्यकाल पूरा करने वाले राष्ट्रपति के लिए अमेरिका में कोई खास भूमिका नहीं रह जाती है। उसका पूरा ग्लैमर नये राष्ट्रपति पर सिमट जाता है। एक प्रकार का निर्वतमान हो रहे राष्ट्रपति अपने मन की बात रखते है।…

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यूपी चुनाव में भाजपा नेतृत्व की “पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक”

यूपी चुनाव में भाजपा नेतृत्व की “पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक”

कुंवर अशोक सिंह राजपूत ‘पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक’ सत्ता के दरवाजे तक पहुँचने के लिए बेहद जरूरी और सटीक तरीका है, आगामी विधान सभा के नजरिये से उत्तर प्रदेश भाजपा में विरोधी दलों के बाहरी-परदेशी सहित दलबदलू और एन-केन तरीके से सत्ता के सदैव साथ में रहने के आदी राजनीतिक-परिंदे भाजपा की ठूंठ हो रही डालियों पर अपना जमाव और कब्जा बनाने में जोर से लग गए हैं। 2017 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के…

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बढ़ी है कांग्रेस की वेदना

बढ़ी है कांग्रेस की वेदना

डा. दिलीप अग्निहोत्री विदेश यात्रा से वापस लौटने के बाद राहुल गांधी पुनः अज्ञातवास के बाद कुछ नया देखना चाहते थे, उन्हे निराशा हुई। संयोग से स्वदेश लौटने के बाद उन्हें एक बड़े सम्मेलन का समापन करना पड़ा। पहले यह कार्य कांग्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी को करना था, लेकिन अब यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि वह अपनी भूमिका सीमित कर रही हैं। राहुल को वह सभी अवसर दे रही हैं जिनकी अपेक्षा…

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डायरी के खोखले और डरावने सच का अंत

डायरी के खोखले और डरावने सच का अंत

प्रभुनाथ शुक्ल सहारा और बिड़ला समूह की डायरियों से निकले सियासी जिन्न का आखिर अंत हो गया। सर्वोच्च संवैधानिक पीठ यानी शीर्ष अदालत ने इसे सुनवाई के लायक ही नहीं माना और अपर्याप्त साक्ष्य के अभाव में फैसला खारिज कर दिया। डायरी पर राजनीति का रास्ता बंद हो गया। सहारा और बिड़ला समूहों के यहां छापेमारी के दौरान सीबीआई और आयकर विभाग को संबंधित दस्ताबेज मिले थे। उसमें कुछ नेताओं को पैसा देने का आरोप…

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भारत 2020 का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य चूक जाएगा?

भारत 2020 का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य चूक जाएगा?

श्रेया शाह पिछले साल अप्रैल में बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने दोहराया था कि भारत का 2020 तक 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसे पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन इंडियास्पेंड का विश्लेषण दिखाता है कि कमजोर अवसंरचना और सस्ते वित्तीय सहायता के अभाव में सौर ऊर्जा में विस्तार करना चुनौतीपूर्ण है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को अगले छह सालों में निश्चित रूप से 130.76…

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लापरवाहियों के बीच हो रही है हवाई-यात्रा?

लापरवाहियों के बीच हो रही है हवाई-यात्रा?

रमेश ठाकुर एविएशन क्षेत्र में भारत आज भी दूसरे देश से काफी पीछे है। नए विमानन नियम, नई सहूलियते, आधुनिक तामझाम, यात्रा में सुगमता की गारंटी और भी कई तमाम हवाई कागजी बातें उस समय धरी की धरी रह जाती हैं जब प्लेन उड़ने से पहले अपनी अव्यवस्था बयां कर देता है। उदाहरण दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सपाट रनवे पर आमने-सामने एक साथ दो विमानों का आ जाना। इसे एटीएस का गलती…

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नोटबंदी: मियाद खत्म, करिश्मे की बारी

नोटबंदी: मियाद खत्म, करिश्मे की बारी

ऋतुपर्ण दवे कालाधन, राजनैतिक रसूख, डिजिटल लेन-देन और अपने ही सीमित पैसों के लिए कतार में छटपटाता 90 फीसदी बैंक खाताधारी आम भारतीय। शायद यही भारत की राजनीति का एक नया रंग है जो ’नोटबंदी’ के रूप में एकाएक, आठ नवंबर रात की आठ बजे अवतरित हुआ और सम्मोहन जैसा, चुटकी बजाते देशभर में छा गया। अमेरिका में ट्रंप की जीत से लोग जितना भौंचक हुए, उससे कहीं ज्यादा नोटबंदी और बाद की जनप्रतिक्रियाओं से…

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विश्व की सभी समस्याओं का शान्तिपूर्ण समाधान है ‘भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51’

विश्व की सभी समस्याओं का शान्तिपूर्ण समाधान है ‘भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51’

प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’, शैक्षिक एवं वैश्विक चिन्तक भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की मूल शिक्षा ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ की भावना पर आधारित भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 विश्व एकता का संदेश देता है। संविधान के अनुच्छेद 51 के अनुसार भारत का गणराज्य (क) अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करेगा, (ख) राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण संबंधों को बढ़ाने का प्रयत्न करेगा, (ग) संसार के सभी राष्ट्र अन्तर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान करें ऐसा प्रयत्न करेगा…

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