योगी युग और जन आकांक्षाएं



घनश्याम भारतीय

समुदाय विशेष के लिए तीखे बयानों और शाब्दिक प्रहारों के चमत्कारिक प्रभाव से देश की सियासत में हिंदूवादी नेता के रूप में उभरे योगी आदित्यनाथ के हाथों राज्य की सत्ता सौंप कर भाजपा नेतृत्व ने जिस परिवर्तन की कल्पना की है, वास्तव में वह किसी चुनौती से कम नहीं है। 19 मार्च 2017 को लखनऊ के मान्यवर कांशीराम स्मृति उपवन में समारोह पूर्वक प्रदेश के 21वे मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल के शपथ लेने और सूबे की सत्ता संभालने के साथ ही राज्य में योगी युग का आरंभ हो गया। संपूर्ण देश में चले मोदी मैजिक से उत्तर प्रदेश में आए योगी युग में जन आकांक्षाएं भी कम नहीं है। जिसे पूर्ण करना योगी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

यद्यपि प्रत्येक नागरिक की हर इच्छा आकांक्षा को पूर्ण करना आसान नहीं है फिर भी एक बड़े समूह की भावनाओं की कद्र करते हुए उनकी उम्मीदों की कसौटी पर खरा उतरना बड़ा काम है। जो योगी सरकार के सम्मुख पूरे 5 वर्ष तक खड़ा रहेगा।सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ हुई भाजपा सरकार के लिए भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण जितना महत्वपूर्ण है उतना ही ’गो’, ’गंगा’ और ’राम’ के साथ हिंदुत्व की रक्षा भी है। परन्तु यह सब गैर हिंदू समुदाय को विश्वास में लेकर ही संभव है। इसके अलावा गरीबो,किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों, महिलाओं व वरिष्ठ नागरिकों की भी आकांक्षाए और आवश्यकताएं कम नहीं है।

विधानसभा के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश में 325 सीटों के साथ जिस तरह प्रचंड बहुमत मिला उससे एक बात पूरी तरह साफ हो गई कि सूबे की जनता जाति-धर्म के नाम पर भेदभाव की संकीर्णता भरी राजनीति से ऊब चुकी थी। साथ ही कई सियासी दलों की निकृष्टतम कार्यप्रणाली से मुक्ति चाह रही थी। बस यही वजह थी कि नोटबंदी से उत्पन्न पीड़ा को भूल कर लोगों ने मतदान किया। खासतौर से सपा बसपा का मोह त्याग दलित और अति पिछड़े वर्ग के लोगों ने सवर्ण जातियों के साथ मिलकर भाजपा को उच्चतम स्थान दिया। यही नहीं टिकट बंटवारे के समय जिस मुस्लिम समाज को भाजपा ने दरकिनार किये रखा उसने भी कमल खिलाने में अंदर खाने से दिलचस्पी दिखाई। देवबंद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल कई सीटों पर भारी अंतर से भाजपा की जीत इसका प्रमाण है। समीक्षक मानते हैं कि तीन तलाक जैसे गंभीर मुद्दे पर भाजपा द्वारा छेड़े गये राग का उसे व्यापक लाभ मिला है। क्योंकि तीन तलाक के बोझ से आधी आबादी का एक बड़ा हिस्सा छटपटा रहा है। माना जा रहा है कि उम्रदराज महिलाओं ने जहां नई नस्लों को इससे बचाने की मंशा से मतदान किया वहीं पढ़ी-लिखी नस्ले उनसे भी आगे निकल गई। इन सभी को भाजपा में उम्मीद दिखी।

यह भी सही है कि भाजपा ने अति पिछडी जातियों को दो साल पहले से ही जोडना शुरु कर दिया था। इसके लिए ओम माथुर को प्रदेश प्रभारी बनाते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य और केशव प्रसाद मौर्य को महत्व देने के पीछे यही मकसद था।रही बात दलितों की तो उसे जोडने की कमान प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं संभाल रखी थी। इसीलिये बाबा साहब से जुडे पांच स्थलों को पंचतीर्थ के रुप में विकसित करने का निर्णय केन्द्र सरकार ने लिया। उज्जवला योजना में ज्यादातर लाभ दलित महिलाओं को मिला। रविदास जयन्ती पर मोदी वाराणसी स्थित संत रैदास (रविदास) की जन्मस्थली गये। इसके अलावा भाजपा को सभी वर्ग के युवाओं का व्यापक समर्थन मिला। सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले ज्यादातर युवा भाजपा के साथ रहे।

अब जब सूबे में योगी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बन चुकी है तब आम नागरिकों कि वह प्रत्येक आकांक्षाएं प्रबल हो उठी हैं, जिसके लिए लोगों ने वोट दिया। इसमें कृषक वर्ग सबसे आगे है। क्योंकि बीते कुछ वर्षों में अवर्षण की स्थिति ने किसानों की रीढ़ ही तोड़ दी थी। बर्बाद होती फसल देख जहां किसान खून के आंसू रोया वहीं कर्ज के बोझ ने आत्महत्या को भी विवश किया। इसी बीच पिछले वर्ष धान की संतोषजनक फसल तो हुई परंतु नोटबंदी और खरीद एजेंसियों की मनमानी पुनः भारी पड़ गयी। ऐसे में अन्नदाता की स्थिति सुधार कर उसके चेहरे की मुस्कान वापस लाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी ळें यह तभी संभव है जब समय से उर्वरक, उन्नतशील बीज, कीटनाशक दवाएं और कृषि उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित हो। हर खेत को यथा समय पानी मिले। बिचौलियों से मुक्ति के साथ-साथ कृषि उत्पादन की बिक्री आसान हो और उसका समुचित मूल्य मिले। कर्ज की दर सस्ती हो और मजबूर किसानों का कर्ज माफ हो। कृषि को उद्योग का दर्जा देते हुए किसानों के कल्याणार्थ कृषि आयोग गठित किया जाय। किसानों को समय-समय पर तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाएं। प्रत्येक किसान को फसल बीमा का लाभ मिले। अपने उत्पादन का मूल्य निर्धारण का अधिकार किसान के हाथ में हो। उसके बच्चों को बेहतरीन शैक्षिक अवसर प्रदान किए जाएं। घट रही, बट रही और छीन रही खेती के संरक्षण पर गहन विचार हो।

इसके अलावा युवाओं को रोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध हो ताकि उन्हें किसी पर न आश्रित रहना पड़े और न ही उनके कदम अनैतिक कृत्यों की ओर बढ़े। बहू-बेटियां कभी भी, कहीं भी निर्भय होकर आ जा सकें। गरीबों की जमीन सुरक्षित रहे। उन पर दबंगई का कोड़ा न चले। और यदि ऐसा होता है तो उनकी एक चीख पर प्रशासन हाजिर हो। गरीब के लिए न्याय के दरवाजे खुल जायें। देर रात तक व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहें। कोई उनसे रंगदारी न मांगे। दफ्तरों में भ्रष्टाचार का भेड़िया झांकने का साहस तक न कर सके। कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के असल जरूरतमंद तक पहुंचें। जाति धर्म के नाम पर शोषण एवं उत्पीड़न बंद हो और अमन चैन कायम हो। गैर हिंदुओं को भी इंसान समझा जाय। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ तीन तलाक जैसे गंभीर मसले पर प्रभावी कदम उठाये जाएं। यदि आम जनता की इन सारी आकांक्षाओं के मद्देनजर योगी सरकार ने गंभीरता पूर्वक विचारोंपरांत अमल किया तो आने वाला दिन फिर उसी का होगा।
यही नही प्रदेश का मुखिया बनने के बाद योगी को अपनी योग साधना के फल से प्रदेश वासियों को लाभान्वित करने के लिए जाति,धर्म और क्षेत्र जैसी संकीर्णताओं के दायरे से निकलकर राष्ट्र धर्म के वास्तविक अर्थों को चरितार्थ करना होगा। हिन्दुओं की आकांक्षाओं पर खरा उतरते हुए गैर हिन्दुओं के मन की शंकाओं को दूर करना होगा। तभी राज्य के विकास के नये सोपान तय हो सकेंगे। निसन्देह कहा जा सकता है कि राष्ट्रवादी सिद्धान्तों के साथ मानवतावादी दृष्टिकोण यदि अपनाया गया तो उत्तर प्रदेश को देश का आदर्श राज्य बनने से कोई ताकत नही रोक सकती।

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