चलो बुलावा आया है , ट्रंप ने बुलाया है



सियाराम पांडेय ‘शांत’ 

बधाई संदेश भी मेल-मोहब्बत बढ़ाते हैं। एक-दूसरे के साक्षात्कार में, प्रत्यक्ष वार्ता में सहायक होते हैं। अमेरिका इसका गवाह बनने जा रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आमने-सामने होंगे। न केवल एक दूसरे की कुशल क्षेम जानेंगे,बल्कि वैश्विक राजनीति की दशा और दिशा भी तय करेंगे। इससे उभय देशों के संबंधों को तो मजबूती मिलेगी ही, कारोबार और विकास के भी नए प्रतिमान स्थापित होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप दोनों ही एक दूसरे को अपने यहां आने का फोनिक न्यौता दे चुके हैं। इस न्यौते की बिना पर मोदी अमेरिका जा भी रहे हैं। अगर वे वहां भी अपना बनारस वाला संवाद दोहरा दें तो किसी को भी आश्चर्य नहीं होगा। लोकसभा चुनाव से पूर्व वाराणसी पहुंचे नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मैं यहां खुद नहीं आया हूं, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है। इस संवाद का वाराणसी खासकर पूर्वांचल में बेहद असर हुआ था। अगर इसी तरह का डाॅयलाॅग मोदी ने ट्रंप के संदर्भ में बोल दिया तो वे हर अमेरिकी के दिल में छा जाएंगे। राजनीति में प्रयोगधर्मिता तो चलती ही रहती है और इस खेल में मोदी का कोई सानी नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जून में प्रस्तावित अमेरिकी यात्रा से जहां देश में उत्साह का माहौल है, वहीं पाकिस्तान घबराया हुआ है। उसे डर लग रहा है कि अगर नरेंद्र मोदी ने बराक ओबामा जैसा जादू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी कर दिया तो उसका क्या होगा ? पाकिस्तान की छटपटाहट स्वाभाविक भी है। वह भारत को अपना चिर शत्रु मानता है और शत्रु की हर गतिविधि पर नजर रखना एक सजग और सतर्क देश की जिम्मेदारी भी बनती है। वैसे भी पाकिस्तान के ग्रह-नक्षत्र इन दिनों उल्टे चल रहे हैं। बलूचिस्तान में अपने नागरिकों के अपहरण और हत्या की घटना से चीन उससे नाराज है। चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कजाकिस्तान की राजधानी में हुए शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से जिस तरह दूरी बनाई, उनसे बेरुखी की, उससे पाकिस्तान अंदर तक हिला हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो कई बार आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को चेता चुके हैं। ऐसे में मोदी-ट्रंप की वार्ता पाकिस्तान की छाती पर मूंग दलने वाली साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  25 जून को अमेरिका पहुंच रहे हैं। उसके अगले ही दिन वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने वाले हैं। मोदी चमत्कारी नेता हैं। अपने अमेरिका दौरे के दौरान वे ह्यूस्टन में प्रवासी भारतीयों को मेडिसन स्क्वेयर गार्डन की तरह संबोधित कर सकते हैं। भले ही मोदी और ट्रंप के बीच तीन टेलीफोनिक वार्ता ही हुई है लेकिन इससे दोनों ही नेताओं के बीच आत्मीय रिश्ता तो बना ही है। जब दोनों नेता आमने-सामने होंगे। आंख से आंख मिलाकर बात करेंगे तो उसके नतीजे भी बहुत खास होंगे, इस सच से इनकार नहीं किया जा सकता। मोदी-ट्रंप मुलाकात को लेकर जितने परेशान पाकिस्तान और चीन हैं, भारत में उसे कम परेशान कांग्रेस भी नहीं है।

कांग्रेस के एक नेता जिस तरह भारतीय थल सेना अध्यक्ष को सड़क का गुंडा कह रहे हैं और इसी बहाने कहीं न कहीं पाकिस्तान और चीन का समर्थन कर रहे हैं,वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौ में से शून्य अंक दिए हैं। बेंगलुरु में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री ने नौकरियां पैदा करने के लिए कुछ नहीं किया है। मोदी सरकार जितना पैसा प्रचार के लिए खर्च करती है, उतना पैसा कांग्रेस खर्च नहीं कर सकती, क्योंकि वह पैसा सरकार का है न कि किसी पार्टी का।  मौजूदा वक्त में जो लोग सच्चाई के साथ हैं, उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। दलितों को मारा जा रहा है, अल्पसंख्यकों को सताया जा रहा है और मीडिया को धमकाया जा रहा है। मतलब उनकी नकारात्मक छवि बनाने का एक भी मौका कांग्रेस अपने हाथ से जाने नहीं दे रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस तरह का मूल्यांकन करने से पूर्व राहुल गांधी को देश की अर्थव्यवस्था पर आए केन्द्रीय सांख्यिकी विभाग के आंकड़े तो देख ही लेने चाहिए थे। अप्रैल महीने के दौरान देश में आर्थिक गतिविधि मापने के लिए औद्योगिक  उत्पादन के आंकड़े 3.1 फीसदी थे जबकि मार्च में यह आंकड़े 2.7 प्रतिशत थे।ये आंकड़े बताते हैं कि मई में खुदरा महंगाई कम होकर 2.18 प्रतिशत पर रही जबकि अप्रैल के दौरान खुदरा महंगाई 2.99 फीसदी के स्तर पर थी। राहुल गांधी और उनकी राय में यकीन रखने वालों को यह भी सोचना होगा कि जो मोदी विदेशों में भारतीय हीरो की तरह सममानित होते हैं, भारत में विपक्ष उन्हें जीरो क्यों आंकता है? कहीं प्रतिपक्ष का दृष्टिदोष तो नहीं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा ऐसे मौके पर हो रही है जब अमेरिका पेरिस पर्यावरण समझौते से यह कहकर अलग हो गया है कि अगर वह इस समझौते पर अमल करता है तो 2025 तक अमेरिका में 27 लाख नौकरियां खत्म हो जाएंगी। इस समझौते का सबसे ज्यादा लाभ भारत और चीन को होगा। एच-1बीजा  को लेकर भी ट्रम्प प्रशासन  बेहद सख्त रहा है। भारत इस पर अपनी सख्त प्रक्रिया जाहिर कर चुका है। माना जा रहा है कि मोदी और ट्रंप की इस मुलाकात के दौरान  रक्षा सहयोग , आतंकवाद के उन्मूलन, अलावा न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप्स (एनएसजी) में भारत की सदस्यता और दक्षिण एशिया के मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। फॉसिल फ्यूल पर भी दोनों देश आम राय बना सकते हैं। कुछ बड़े और अहम अनुबंध भी हो सकते हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति एक्सपोर्ट बढाने के पक्षधर हैं। वे चाहते हैं कि विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश करें और नौकरी में भी अमेरिकी नागरिकों को महत्व दें। भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद कुछ इसी तरह की राय नरेंद्र मोदी ने भी जाहिर की थी। उनके मेक इन इंडिया के उद्घोष में इसी भावना की अभिव्यक्ति होती है। भले ही राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप की मोदी के साथ यह पहली मुलाकात हो लेकिन मार्च में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नरेंद्र मोदी को मार्च में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा राज्यों में भाजपा की जीत पर बधाई भी दे चुके हैं। ट्रम्प ने शपथ लेने के चार दिन बाद 24 जनवरी को मोदी को फोन किया था। तब दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अपने-अपने देश आने का न्योता भी दिया था। 9 नवंबर को ट्रम्प के प्रेसिडेंट चुने जाने के बाद मोदी ने फोन करके उन्हें बधाई दी थी।

मौरतलब है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच आठ मुलाकातें हुई थीं। इस दौरान मोदी ने 3 बार अमेरिका का दौरा किया था। आखिरी बार मोदी जून 2016 में अमेरिका गए थे। समझा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति के समक्ष पाकिस्तान की कलई खोलने से भी पीछे नहीं हटेंगे। वे संभवतः यह भी बताना चाहेंगे कि निर्दोष भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को भले ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर फांसी की सजा सुना दी हो  लेकिन भारत ने इसके बाद भी पाकिस्तान के 11 कैदियों को रिहा कर दिया। बाघा बॉर्डर के जरिए उन्हें पाकिस्तान भेज दिया। पाकिस्तान इसके बाद भी भारत का अहसान मानने को तैयार नहीं है। वह यह कह रहा है कि इन सभी कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली थी। इसीलिए भारत ने उन्हें रिहा किया है। सवाल यह उठता है पाकिस्तान में भी कई भारतीय कैदी ऐसे हैं जिनकी सजा की अवधि समाप्त हो चुकी है, उन्हें तो वह रिहा नहीं कर रहा है। इसका मतलब साफ है कि भारत पाकिस्तान को कदम-कदम पर कूटनीतिक शिकस्त दे रहा है। उसे यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि वह आज भी पाकिस्तान को अपना मानता है। वह तो पाकिस्तान ही है जो हर बार भारत की पीठ में छुरा भोंक देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बराक ओबामा की तरह ट्रंप को भी भारत आने का न्यौता देंगे। ओबामा ने गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य आतिथ्य स्वीकार किया था। ट्रंप स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर भारत आएं तो इसमें शायद ही किसी को आश्चर्य हो। ट्रंप अमेरिका में जिस तरह मोदी की नीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं, उससे इतना तो साफ है कि इन दोनों नेताओं की सोच एक जैसी है। ऐसे में अगर दोनों के बीच दोस्ती परवान चढ़ती है तो इससे दोनों ही देशों को लाभ होगा। विश्व की राजनीति में मोदी की यह यात्रा कुछ खास बदलाव लाएगी, इस बात की उम्मीद तो की ही जा सकती है।

Leave a Reply

TEVAR TIMES is Stephen Fry proof thanks to caching by WP Super Cache