भाजपा के लिए ऐतिहासिक क्षण और भावी राष्ट्रपति



डा. प्रदीप टण्डन

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है। वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन (एनडीए) में भाजपा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, पहली बार भाजपा बहुमत वाली सरकार को अवसर मिला है कि वो अपनी पसंद के व्यक्ति को राष्ट्रपति के पद पर आसीन कर सके।

राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। जिसमें संसद के दोनों सदनों के एमपी और राज्य की विधानसभाओं के एमएलए व विधान परिषदों के एमएलसी शामिल होते हैं। वर्तमान राजनीतिक परिस्थिती के मुताबिक संसद के दोनों सदनों में कुल 776 एमपी हैं तथा सभी राज्यों के कुल 4120 विधायक हैं। संवैधानिक नीति के अनुसार इस निर्वाचक मंडल में कुल 11 लाख वोट हैं। जिसमें से भाजपा के पास 4.3 लाख वोट हैं, भाजपा के सहयोगियों को मिलाकर एनडीए के पास 5.2 लाख वोट हैं, जो कि निर्वाचक मंडल के 11 लाख वोट की आधी संख्या है।

पिछले कुछ महीनों में इस बात का व्यापक अनुमान लगना शुरू हो गया है कि भाजपा का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कौन होगा। आज की और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली पिछली एनडीए सरकार की स्थितियों की तुलना करना बहुत शिक्षाप्रद होगा, जब अटल बिहारी वाजपेयी जी को भी राष्ट्रपति उम्मीदवार से संबंधित अपनी पसंद के उम्मीदवार पर इसी प्रश्न का सामना करना पड़ा था। अक्सर जैसाकि हम सब जानते हैं श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने परिस्थितियों को समझते हुए ऐसे उम्मीदवार का चयन किया जिसे सभी दलों ने समर्थन दिया। तत्कालीन सत्तारूढ़ शासन ने समझदारी का परिचय देते हुए डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को एनडीए का उम्मीदवार चुना। यह एक मास्टर स्ट्रोक था। आज की तारीख़ में हालांकि भाजपा को अपने हिन्दु पुनरूत्थान के मुद्दे को अनदेखा करने की आवश्यकता नहीं है फिर भी वो आम सहमति उम्मीदवार चुनना चाहती है। जैसा कि अभी तक की प्रबल संभावनाऐं हैं कि भाजपा ऐसा उम्मीदवार चुन सकती है जो कि अपने मुख्य एजेंडा का प्रतीक बन सकता हो और चुनावी मैदान में लाभकारी सिद्ध हुआ हो।

सत्तापक्ष की तरफ से आम सहमति से राष्ट्रपति का चुनाव करना लोकतांत्रिक मूुल्यों को मजबूत बनाने की प्रक्रिया जरूर है परन्तु विपक्षी दलों का रवैया बहुत उत्साहवर्धक नहीं है। विपक्षी पक्ष के 17 दलों के समूह में बैठकों का दौर जारी तो है परन्तु इनका ये कहना कि सत्तापक्ष अपनी तरफ से उम्मीदवार का नाम घोषित करे फिर हम अपनी रणनीती बनाएंगे, यह इनकी मनरू दशा को इंगित करता है। इतिहास भी गवाह है कि राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर आम सहमति की परिकल्पना संवैधानिक रूप में तो चर्चा में रहती है परन्तु व्यवहारिता में अमली जामा राजनीतिक दल नहीं पहना पाते। यहाँ सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रमुख भाजपा ने राजनाथ सिंह की अगुवाई में अपने तीन मंत्रियों की समिति बना कर उन्हें विपक्षी दलों व सहयोगी दलों से इस विषय पर विचार विमर्श करके आम सहमति बनाने को कहा है। इस समिति में राजनाथ सिंह, अरूण जेटली व वैंकया नायडू हैं। यह एक सकारात्मक पहल है, जो भारत जैसे विशाल बहुभाषी बहुसांस्कृतिक देश के लिए जरूरी भी है।

वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी निगरीनी में अनंत कुमार, मुख्तार अब्बास नकवी और भूपेन्द्र यादव की टीम बनाई है जो राष्ट्रपति चुनाव के तकनीकी पहलुओं के साथ­-साथ एनडीए के सांसदों, विधायकों, सभी राज्यों के प्रभारी व एजेंटों को नियुक्त करने जैसे विषयों पर विचार विमर्श करके पार्टी नेतृत्व को अवगत कराऐंगे। मजे की बात यह है कि भाजपा कई निर्दलीय सांसदों व विधायकों से भी रापता बनाए हुए है। महत्वपूर्ण बात यह है कि टीआरएस, एसवाईआर कांग्रेस, अन्ना द्रमुक जैसे दलों के साथ आ जाने से एनडीए को अपना मनपसंद राष्ट्रपति उम्मीदवार जिताने के लिए पर्याप्त वोट हैं। इसी कड़ी में बीजू जनता दल जैसे कुछ अन्य दलों का सहयोग एनडीए को मिलने की संभावना है।
संभावना है कि 23 जून से पहले एनडीए अपने राष्ट्रपति उम्मीदवार का ऐलान कर देगा। एनडीए उम्मीदवार 23-24 जून को पर्चा दाखिल कर सकते हैं। 28 जून पर्चा दाखिल करने की अंतिम तिथी है। 17 जुलाई को राष्ट्रपति का चुनाव है। यह संयोग की बात है कि एक तरफ विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र भारत में सर्वाेच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया आरंभ है तो वहीं विश्व पटल पर अपना वर्चस्व रखनेवाली अमरीका के राष्ट्रपति से भारत के प्रधानमंत्री की मुलाकात का कार्यक्रम भी 25 जून से है। न केवल भारत बल्कि विश्व के कई देश आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक चुनौतियों से दो चार हो रहे हैं, ऐसे में भारत में राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को होना चाहिए जो न केवल राष्ट्रीय नीतियों की बल्कि अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में भी अपनी छाप छोड़ने वाला आधुनिक सोच के साथ राष्ट्रवादी मूल्यों पर भी खरा हो।

ऐसी आशा की जानी चाहिए कि वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन (एनडीए) की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सर्वोच्च ऐतिहासिक पद राष्ट्रपति के इस चुनाव में महत्वपूर्ण निर्णायक अवसर मिला है, कि भारतीय जन मानस की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव में परिपक्वता व दूरदर्शिता का परिचय देकर खुद को मील का पत्थर साबित करेगी।

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