परीक्षण सफल रहा तो, आने वाले दिनों में रेल पटरी ‘चटकते’ ही चल जाएगा पता

मथुरा। रेल मंत्रालय के लिए डिजाइन एवं मानक तय करने वाले अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के द्वारा विकसित रेल पटरियों की निगरानी एवं चेतावनी प्रणाली का परीक्षण यदि सफल रहा तो, कानपुर जैसे रेल हादसों से बचा जा सकता है। देश में इन दिनों उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद मण्डल में बमरौली एवं भरवारी स्टेशनों के बीच 25 किलोमीटर लंबी रेलवे पटरी पर ऑनलाइन काम करने वाले इस उपकरण का परीक्षण इसी माह शुरू किया गया है। पायलट परियोजना के प्रथम चरण के तहत उत्तर रेलवे को भी चुना गया है।

उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना ने यह जानकारी दी। सक्सेना रूंधी से आगरा तक सभी स्टेशनों एवं रेल लाइनों पर चल रही परियोजनाओं का वाषिर्क निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि रेल पटरी तोड़े जाने अथवा ठण्ड के कारण उनके ‘चटकने’ की शिकायतों की रोकथाम के लिए आरडीएसओ ने एक यंत्र विकसित किया है। यह यंत्र परीक्षण के लिए अभी इलाहाबाद के निकट बमरौली और भरवारी स्टेशनों के बीच 25 किलोमीटर लंबी पटरी पर लगाया गया है। सक्सेना ने बताया कि रेल पटरी के किसी भी स्थिति में टूटने पर इस यंत्र की मदद से यह जानकारी रेलवे के निगरानी तंत्र को तुरंत ऑनलाइन मिल जाएगी।

उन्होंने बताया कि यदि यह प्रणाली सफल होती है तो आरडीएसओ की सलाह पर रेल मंत्रालय इस उपकरण की मदद से बड़ी से बड़ी दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली भारी जान-माल की हानि से बचने के लिए अन्य क्षेत्रों में भी इसकी स्थापना कर सकता है।

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