एसएचआरसी ने ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ पर लोगों के सुझाव मांगे

नई दिल्ली। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश प्रकाश टाटिया ने शनिवार को ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ के तहत महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर लोगों के विचार और सुझाव मांगे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर लोगों को विचार और सुझाव देने के लिए दो महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जो समाज को प्रभावित कर रहा है। लोगों को मुद्दे पर अपने सुझाव और विचार देने का अवसर देना चाहिए।’

सुझाव और विचार आयोग की वेबसाइट पर डाले जा सकते हैं, या डाक के माध्यम से जयपुर स्थित आयोग के कार्यालय में भेजे जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि भारत में महिलाओं को और अधिक प्रभावशाली सुरक्षा प्रदान के लिए प्रोटेक्शन ऑफ वूमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट-2005 (डीवी एक्ट) बनाया गया। लिव-इन-रिलेशनशिप को डीवी एक्ट के तहत मान्यता प्रदान की गई है। इस विषय में आयोग को मिले प्रकरणों में मानवता को प्रभावित करने वाले प्रश्न उत्पन्न हुए है और यही कारण है कि आयोग ने स्व-प्रेरणा से प्रकरण दर्ज किया। बता दें कि अभी तक कानूनन बिना शादी से उत्पन्न बच्चों के लिए अवैध संतान का नाम दिया गया है।

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