धूल में लिपटा आनंद विहार, लोगों का सांस लेना हुआ मुश्किल



नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का केंद्र बना आनंद विहार धूल में लिपटा हुआ है। दिल्ली के इस पूर्वी इलाके में आसमान धुंधला है और धुएं की वजह से हवा दब गई है और ज्यादातर लोगों ने चेहरे पर मास्क लगा रखा है।

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि सड़कों की सफाई और बेहतर यातायात प्रबंधन के जरिए इस इलाके में धूल को रोकने के लिए दिल्ली के पर्यावरण विभाग का बहुप्रचारित विशेष अभियान केवल कागज और कलम तक सीमित है। बहरहाल, इस क्षेत्र में प्रदूषण के लिए उत्तर प्रदेश के तहत आने वाले पड़ोसी इलाके गाजियाबाद का प्रशासन भी जिम्मेदार है जो व्यस्त आनंद विहार आईएसबीटी में वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं पर लगाम लगाने के लिए कुछ खास नहीं कर रहा है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने हाल ही में कहा था कि आनंद विहार में प्रदूषण का उच्च स्तर पूरे शहर की आबोहवा पर विपरीत असर डाल रहा है। एक ऑटो चालक दलीप सिंह ने कहा कि सरकार ने दस साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर बैन लगा दिया है लेकिन इसके बावजूद वे सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यहां आईएसबीटी में साफ तौर पर जो बसें पुरानी दिख रही हैं, वे भी चल रही हैं जिससे मेरे और अन्य लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया है। इस इलाके के आसपास स्थित उद्योग और नजदीकी गाजीपुर लैंडफिल साइट से उठने वाला धुआं भी यहां वायु प्रदूषण के बढ़ने के लिए जिम्मेदार है।

स्थानीय दवा दुकानों के मालिकों ने बताया कि उनके पास मास्क और एयर प्यूरीफायर के बारे में पता करने वाले लोगों की आमतौर पर भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि दीपावली के तुरंत बाद श्वास नली में संक्रमण या सूजन के कारण सांस लेने में समस्या से जुड़ी बीमारियों के उपचार के लिए दवा लेने वालों की संख्या बढ़ गई है। एक स्थानीय निवासी निशा ने कहा कि मेरे बच्चे आए दिन बीमार पड़ रहे हैं और लगातार अस्पताल के चक्कर लग रहे हैं। मैं अपने बच्चों को इस ड़र से बाहर नहीं खेलने देती कि वे इस आबोहवा को नहीं झेल पाएंगे।

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