मुख्यमंत्री नहीं बना तो शैक्षणिक संस्थान पर ध्यान दूंगाः पारसेकर



पणजी। गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने राज्य विधानसभा के भंग होने की संभावना को खारिज करते हुए आज कहा कि वर्तमान सरकार 11 मार्च की मतगणना के बाद भी काम करती रहेगी। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 के अनुसार राज्य विधानसभा को प्रत्येक छह महीने में कम से कम एक बार बठक करनी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर विधानसभा भंग हो सकती है।

गोवा में पिछला विधानसभा सत्र 26 जनवरी को आयोजित किया गया था और अब इसे 26 फरवरी से पहले कराना होगा। राज्यपाल सत्र बुला नहीं सकते हैं क्योंकि चार जनवरी से यहां आचार संहिता लगी हुई है। राज्य में 40 विधानसभा सीटों के लिए चार फरवरी को मतदान हुआ था। पारसेकर ने कहा, ‘‘चुनाव के बाद हम लोग मतगणना का इंतजार कर रहे हैं। विधानसभा भंग करने का प्रश्न नहीं उठता है। सरकार काम करती रहेगी..मंत्रिमंडल भी बना रहेगा। हम लोग इसलिए बैठक नहीं कर रहे हैं क्योंकि हम नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते हैं।

जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या नए मुख्यमंत्री का कार्यभार संभालना कठिन होगा तो इस पर उनका जवाब था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि ऐसा वक्त नहीं आएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 मार्च से पहले बजट पेश करना कठिन नहीं होगा क्योंकि इससे संबंधित विभाग पहले से ही अपना काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य के वित्तीय मामले ठीक से काम कर रहे हैं। मुख्यंमत्री ने बताया कि सभी पेंशन और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए कोष तय समय सीमा के अंदर जारी हो रहे हैं। नयी सरकार के आने तक हमने नई मंजूरी देना बंद कर रखा है।

पारसेकर ने एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि अगर चुनाव परिणाम के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ता है तो वह शैक्षणिक संस्थान पर ध्यान देंगे। वह यह संस्थान मंद्रेम विधानसभा क्षेत्र में चलाते हैं।

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