विकास में बाधक सभी धर्मस्थलों को हटाया जाये: हाईकोर्ट

इंदौर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर की एक व्यस्त सड़क को चौड़ा करने में बाधक सभी धर्मस्थलों को महीने भर के भीतर बगैर किसी भेदभाव के एक साथ हटाये जाने का आदेश दिया है। इन धार्मिक स्थलों में मंदिर और मस्जिद, दोनों शामिल हैं। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति एससी शर्मा ने कनाड़िया रोड स्थित मस्जिद हनफी अनवारूल उलूम कमेटी के प्रमुख निसार मोहम्मद की दायर याचिका पर कल सात मार्च को कहा, ‘हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है और विकास में बाधक अलग-अलग धर्मस्थलों को हटाने में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिये। लिहाजा निर्देश दिया जाता है कि कनाड़िया रोड के सभी बाधक धर्मस्थलों को एक साथ हटा दिया जाये। इस काम के लिये एक महीने का वक्त दिया जाता है।’

एकल पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह नगर निगम द्वारा कनाड़िया रोड़ पर सभी संबंधित धर्मस्थलों को हटाये जाने का अभियान चलाने के दौरान पर्याप्त बल की तैनाती सुनिश्चित करे। अदालत ने कहा कि नगर निगम कनाड़िया रोड़ को चौड़ा करने में बाधक निजी और सरकारी संपत्तियों को पहले ही हटा चुका है। लिहाजा इस विकास कार्य में बाधक सभी धर्मस्थलों को निश्चित तौर पर हटाया जाना चाहिये। एकल पीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिये 10 अप्रैल की तारीख तय की और आदेश दिया कि इस दिनांक को उसके आदेश की अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाये।

नगर निगम के आयुक्त मनीष सिंह ने मंगलवार को अदालत में खुद हाजिर होकर बताया कि कनाड़िया रोड़ पर बंगाली चौराहे से पत्रकार चौराहे के बीच कुछ धार्मिक स्थल सड़क चौड़ा करने की राह में बाधक बने हुए हैं। सिंह ने कहा कि सड़क चौड़ी न होने से यातायात जाम होता है और बड़ी संख्या में हादसे होते हैं। लिहाजा सड़क को चौड़ा करने के लिये सभी बाधक धार्मिक स्थलों को हटाया जाना समय की मांग है। उधर, याचिकाकर्ता मस्जिद हनफी अनवारूल उलूम कमेटी की ओर से अदालत में कहा गया कि कनाड़िया रोड़ की यह मस्जिद वक्फ से ताल्लुक रखती है और सड़क चौड़ा करने के लिये इस धार्मिक इमारत को हटाया नहीं जा सकता।

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