यूपी चुनाव: BJP में CM पद के लिए इन नामों पर चर्चा

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के रुझानों से यह साफ हो गया है कि यूपी में भाजपा सरकार बनाएगी. भाजपा रुझानों में 300 से ज्यादा सीट पर आगे है। भाजपा ने यूपी चुनाव में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. ऐसे में अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर होंगी. भाजपा में ऐसे कई नेता हैं जो मुख्यमंत्री बनने की योग्यता रखते हैं. समय-समय पर मुख्यमंत्री पद के लिए इन नामों की चर्चा होती आयी है. मीडिया रिपोर्टों की अगर मानें तो भाजपा इन नेताओं में से किसी एक को यह अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है.
राजनाथ सिंह
यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और संगठन से लेकर संघ तक इनकी काफी पकड़ है. मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में राजनाथ सिंह का नाम सबसे आगे है. कई मौकों पर राजनाथ सिंह यूपी में सीएम बनने की संभावनाओं को टाल चुके हैं लेकिन पार्टी फिर भी उन्हें यह जिम्मेदारी दे सकती है. गृहमंत्री के बेटे पंकज सिंह भी नोएडा से चुनाव मैदान में हैं.

केशव प्रसाद मौर्य
2014 के लोकसभा चुनावों में जीत के बाद पार्टी में केशव प्रसाद मौर्य के कद में गुणात्मक बढ़ोत्तरी देखने को मिली है. सबसे अहम कारण ये है कि यूपी में बीजेपी लगातार ओबीसी वोटरों को टारगेट करती दिख रही है. जाहिर है 2019 के लोकसभा चुनावों में भी पार्टी का फोकस यूपी में करीब 54 फीसदी वोटर वाले ओबीसी मतदाताओं पर रहेगा. ऐसी स्थिति में ओबीसी बिरादरी से आने वाले केशव की सीएम पद के लिए दावेदारी मजबूत होती दिखती है. उत्तर प्रदेश में केशव प्रसाद मौर्य बीजेपी के पहले विकल्प हो सकते हैं.

दिनेश शर्मा
लखनऊ के मेयर और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा को लेकर सत्ता के गलियारे में खूब चर्चा है. खास बात ये है कि दिनेश शर्मा की संघ से लेकर पार्टी के अलग-अलग गुटों में अच्छी पकड़ मानी जाती है और वह गैर विवादित चर्चा भी रहे हैं. 2014 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सदस्यता प्रभारी बनाया गया है, जिसके बाद सदस्यों के मामले में बीजेपी ने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा किया. यही नहीं लोकसभा चुनावों में जीत के बाद उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से दिनेश शर्मा की करीबी के चलते ही उन्हें गुजरात में पार्टी प्रभारी जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई.

श्रीकांत शर्मा
यूपी चुनाव में राष्ट्रीय मंत्री और राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे श्रीकांत शर्मा को बीजेपी द्वारा मथुरा की वृंदावन सीट से प्रत्याशी घोषित करने के बाद से ही उन्हें सीएम पद का दावेदार माना जाने लगा है. इन्हें अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जटली का करीबी माना जाता है. इनकी दावेदारी इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बीजेपी सर्बानंद सोनोवाल को असम का मुख्यमंत्री बना चुकी है, वह भी राष्ट्रीय प्रवक्ता ही थे. संघ से करीबी और युवा चेहरा के पॉजिटिव प्वाइंट माने जाते हैं.

योगी आदित्यनाथ
पार्टी के फायर ब्रांड नेताओं में से एक योगी ​आदित्यनाथ का नाम पूर्वांचल की राजनीति में अहम माना जाता है. उनकी इस छवि का इस्तेमाल पार्टी ने इस बार के चुनावों में भी जमकर किया. पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक स्टार प्रचारक की हैसियत से आदित्यनाथ की ताबड़तोड़ सभाएं इसका गवाह हैं. संघ में भी उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है लेकिन पार्टी संगठन में योगी के लिए काफी चुनौतियां भी हैं.

मनोज सिन्हा
मनोज सिन्हा गृहमंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाते हैं और पूर्वांचल से आते हैं. पूर्वांचल पर पार्टी का सबसे ज्यादा फोकस रहा है. खुद पीएम मोदी पूर्वांचल में जीत को पार्टी के लिए सत्ता की चाबी मानते हैं. वैसे रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के काम की तारीफ पीएम मोदी भी खासी करते रहे हैं. दूसरी अहम बात ये है कि केशव प्रसाद मौर्य को यूपी प्रदेश का अध्यक्ष, राज्य बिहार में नित्यानंद राय और झारखंड में ताला मरांडी को प्रदेश अध्यक्ष चुनने जैसे चौंकाने वाले फैसले लेने वाले बीजेपी आलाकमान मनोज सिन्हा के नाम पर फैसला ले लें, कोई बड़ी बात नहीं।

स्मृति ईरानी
तेज तर्रार छवि की वजह से स्मृति भी सीएम पद की पसंद बन सकती हैं. स्मृति न सिर्फ एक स्टार प्रचारक हैं, बल्कि अच्छी वक्ता भी हैं. युवाओं और महिलाओं में खासी लोकप्रिय भी हैं. स्मृति ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अच्छी चुनौती दी. यही कारण था कि चुनाव हारने के बाद भी उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया.

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