10 लाख मुस्लिमों ने किए हस्ताक्षर, नहीं चाहिए ‘तीन तलाक’



यह याचिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने शुरू किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: तीन तलाक के खिलाफ जंग के दिनों दिन बढ़ती जा रही है. इसी बीच देशभर के करीब 10 लाख मुस्लिमों ने जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं हैं, ने तीन तलाक को खत्म करने के लिए एक याचिका पर हस्ताक्षर किया है. यह याचिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने शुरू किया है.

सीएनएन के रिपोर्ट्स के मुताबिक इस याचिका को काफी समर्थन मिला, यही वजह रही कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिला. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अप्रत्याशित जीत हासिल करते हुए 403 सीटों में से 312 पर कब्जा जमाया। 1980 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब किसी पार्टी ने राज्य विधानसभा चुनाव में 300 से ज्यादा सीटों पर कामयाबी हासिल की.

हालिया जनगणना के मुताबिक देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 20 करोड़ है, जिसमें लगभग 18.5 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिमों की है. तीन तलाक का मुद्दा अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है. इसी बीच कुछ महिलाओं ने इस संबंध में एक याचिका दायर की है.

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने तीन तलाक के विरोध में अपनी दलील रखते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया था. केंद्र ने कहा था कि यह महिलाओं के साथ अन्याय और भेदभाव की धारणा पैदा करता है. हालांकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शीर्ष अदालत में तीन तलाक की पैरवी करते हुए कहा था कि महिला की हत्या करने से बेहतर उसे तलाक देना है. मुस्लिम संस्था ने कहा, ‘धर्म के नियमों पर अदालती कानून सवाल नहीं उठा सकती.’

बीते साल (2016) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा इसे खत्म करने की वकालत की थी. उन्होंने कहा था, ‘मुस्लिम महिलाओं के जीने के अधिकार को तीन तलाक के जरिए बर्बाद नहीं किया जा सकता.’ इसके साथ ही मोदी ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने और वोटबैंक के लिए इस्तेमाल करने पर विपक्ष की आलोचना की थी.

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