2007 अजमेर दरगाह विस्फोट: कोर्ट ने दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा, तीन लोगों की हुई थी मौत

11 अक्टूबर 2007 को दरगाह परिसर में हुए बम विस्फोट मामले में स्वामी असीमानंद समेत सात आरोपियों को पहले ही संदेह का लाभ देते हुए बरी कर चुका है

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की एक अदालत ने अजमेर दरगाह विस्फोट मामले में बुधवार को भवेश पटेल और देवेन्द्र गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनायी न्यायाधीश दिनेश चंद गुप्ता ने भवेश पटेल पर 10 हजार और देवेन्द्र गुप्ता पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.

ख्वाजा मोइनुदुदीन चिश्ती की दरगाह में 11 अक्तूबर 2007 को रोजा इफ्तार के समय हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गयी थी और 15 अन्य घायल हो गए थे. अदालत ने आठ मार्च को भवेश और देवेंद्र को दोषी करार दिया था जबकि स्वामी असीमानंद को मामले में रिहा कर दिया था. तीसरे दोषी सुनिल जोशी की विस्फोट के कुछ समय बाद ही मौत हो गयी थी.
मामले की जांच पहले एटीएस राजस्थान को दी गई थी लेकिन बाद में इसे एनआईए को हस्तांतरित कर दिया गया जिसने छह अप्रैल 2011 को नयी दिल्ली के एनआईए पुलिस थाने में इसे पुन:दर्ज किया था. इसमें लगभग 149 गवाह थे एवं 451 दस्तावेजों की जांच की गई और एनआईए ने मामले में तीन पूरक आरोप पत्र भी दायर किये थे.

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