शराब पीकर गाड़ी चलाने पर दस हजार जुर्माना होगा

शराब पीकर गाड़ी चलाना आने वाले दिनों में बहुत महंगा पड़ने वाला है। नशे की हालत में गाड़ी चलाते पकड़े गए तो अब दस हजार रूपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। इस संबंध में लोकसभा में आज एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि वर्ष 1988 के मोटर यान कानून में 30 साल बाद संशोधन करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने विधेयक को जल्द से जल्द पारित करने की सदन से अपील करते हुए कहा कि देश में दुनिया में सबसे ज्यादा पांच लाख सड़क हादसे सालाना होते हैं जिनमें डेढ़ लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
गडकरी ने इन हादसों के लिए कम प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नियमों से लेकर यातायात नियमों को जिम्मेदार ठहराया और साथ ही कहा कि जनता में यातायात नियमों के प्रति न सम्मान है और न ही डर। उन्होंने बताया कि विधेयक में यातायात नियमों और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के संबंध में राज्यों के लिए ई गर्वनेंस को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहां ड्राइविंग लाइसेंस बहुत आसानी से मिल जाता है और एक व्यक्ति चार चार राज्यों में जाकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लेता है। गडकरी ने कहा कि अब लोग घर बैठे लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे लेकिन स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए कम्प्यूटर के जरिए परीक्षा देनी होगी। उन्होंने कहा, ”नेता, अभिनेता या पत्रकार चाहे कोई भी हो, सबको परीक्षा देकर ही लाइसेंस मिल सकेगा।’’

गडकरी ने बताया कि देश में 22 लाख प्रशिक्षित ड्राइवरों की कमी है और मोटर यान कानून में संशोधन से लोगों को रोजगार के साथ ही सड़क हादसों में भी कमी लाने में मदद मिलेगी। अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कहा कि सड़क हादसों में अधिकतर युवा लोगों की जान जाती है। गडकरी ने कहा कि नए कानून के प्रभावी होने के बाद यदि मंत्री भी यातायात नियमों का उल्लंघन करता है तो कैमरों के जरिए जुर्माना पर्ची डाक से घर पहुंचा दी जाएगी। उन्होंने साथ ही बताया कि जल्द ही सरकार एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन करने जा रही है जिसके बाद सुरक्षित यातायात के संबंध में एक अभियान चलाया जाएगा।

कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए इसका समर्थन किया लेकिन साथ ही खराब सड़कों को सड़क हादसों का एक मुख्य कारण बताते हुए सड़कों का निर्माण करने वाले ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने के लिए विधेयक में प्रावधान किए जाने की मांग की। वेणुगोपाल ने विधेयक पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि नशे में गाड़ी चलाने पर भारी जुर्माना लगाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि इसे गैर इरादतन हत्या अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाए।

भाजपा के उदय प्रताप सिंह ने कहा कि यह विधेयक देश में आमूल-चूल परिवर्तन लेकर आएगा। इसके माध्यम से देश में वर्ष 2020 से पहले सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी लाने का प्रयास किया जाएगा। सिंह ने कहा कि विधेयक में सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की मदद करने वाले को किसी भी दीवानी या आपराधिक कार्रवाई से मुक्त करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण निर्णय है जिससे लोग दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आएंगे।

तृणमूल कांग्रेस की अर्पिता घोष ने विधेयक में सभी मुद्दों पर विचार किये जाने की बात कही लेकिन राज्यों को और अधिक विश्वास में लेने की जरूरत भी बताई। घोष ने ड्राइवरों की सुविधाओं पर ध्यान देने की और निर्माण के स्तर पर ही वाहनों की गति नियंत्रित किये जाने संबंधी मांगें भी कीं। बीजद के तथागत सथपति ने एक तरफ केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इस विधेयक के लिए गडकरी की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘‘गडकरी बहुत मेहनत करते हैं। मंत्री ने साबित कर दिया है कि सरकार कैसी भी हो लेकिन अच्छा काम किया जा सकता है।’’ उन्होंने भी गाड़ी चालकों की सुविधाओं और उन्हें आराम मिलने जैसे मुद्दों पर मंत्री का ध्यान खींचा। सथपति ने मांग की कि विधेयक में प्रावधान होना चाहिए कि नशे में गाड़ी चलाने और गंभीर रूप से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों का वाहन जब्त कर नीलाम कर दिया जाए और उनका लाइसेंस हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाए। हालांकि अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक और चुटीले अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि दोपहिया वाहनों पर हेलमेट की जांच के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘इसकी क्या जरूरत है। यह बाइक चलाने वालों पर छोड़ना चाहिए। लोग अगर मरना चाहते हैं तो उन्हें मरने दिया जाए।’’

बीजद सांसद ने पूरे देश में गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर में एकरूपता लाने की मांग की। शिवसेना के अरविंद सावंत ने भी कहा कि विधेयक इतनी बारीकी से बनाया गया है कि इसमें सभी मुद्दे समाहित हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण, लाइसेंस बनवाने आदि से सरलीकरण होगा। सावंत ने राजमार्गों के पास और अधिक ट्रॉमा सेंटर खोलने पर विचार करने की बात कही।

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