पावर सेक्टर में हुए रुपये 50 हजार करोड़ से अधिक के घेाटाले



संक्षिप्त विवरण आपके सम्मुख रख रहा हूॅ… तथा कुछ साक्ष्य भी भेज रहा हूॅ…

नन्द लाल जायसवाल

पिछले 10 वर्षो में उत्तर प्रदेश की वर्तमान समाजवादी पार्टी एवं तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी दोनेा में टाईअप है कि यदि हम सत्ता में है तो तुम हमारी पूॅछ सहलाओ और जब तुम सत्ता में आओगे तो हम पूॅछ सहलायेगे। जिससे दोनो सरकारे के घपले घोटाले दबे रहे। ये दोनेा सरकारे अपने को गॉव गरीब किसान मजदूर की हितैषी की स्वॉग रचने में महारत हासिल किये हुए है। तथा तत्कालीन केन्द्र की काग्रेस सरकार इन दोनो के धोटालो पर पर्दा डालने का ही कार्य किये है तथा इन्होने बड़ी खुबसूरती से ’’ मुॅदहू ऑख कतहूॅ कछु नाही’’ को ही चरितार्थ किया है जिससे गॉव गरीब किसान मजदूर को कोई राहत नही मिली अपितु उसकी हालात बद से बदतर हो गयी। जो बिजली जनता को रुपये 1.00 प्रति यूनिट मिलनी चाहिए वह घपलो घोटालो के कारण रुपये 4-5 प्रति यूनिट की दर से मिल रही है। ये दोनो सरकारे जब जब सत्ता मे रही 24 घण्टे बिजली देने की रट लगाती रही । परन्तु हालात में केाई सुधार नही हुआ। कोई यह पूछने वाला नही है कि तुमने 5.00 रुपये का सामान 50 रुपये में क्यो खरीदा? अन्ततोगत्वा जनता की जेब से ही वसूली होनी है। संवेदनशील पदो पर रहने वाले अधिकारियो/कर्मचारियो ने बेसुमार दौलत कहॉ से प्राप्त किये पावर सेक्टर में 50-60 प्रतिशत कमीशन चल रहा है उसकी दुर्दशा का अन्दाजा लगा सकते है। वर्तमान केन्द्र सरकार ने पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त करने हेतु आते ही कोयले की दलाली भ्रष्टाचार को रोका ही नही अपितु कोयला सस्ता एवं उसके नजदीकी कोल ब्लाक राज्य की सीमा के करीब कोयले की खदान को आवंटित किया। जिससे कोयले की उपलब्धता बराबर बनी रहेयही नही कोयले की ग्रेडिग की जॉच का एक छत्र माफिया समाप्त कर मनमानी जहबरन करने वालेा को समाप्त कर 14 सेन्ट्रल फयूल रिसर्च इन्सटीट्यूट के माध्यम से सैम्पलिग की जॉच कही भी कराने तथा उसके द्वारा दिये गये निर्णय को बाध्यकारी बनाया जिससे प्रतिवर्ष बिजली की लागत रुपये 300 करोड़ से अधिक उत्तर प्रदेश के बचाये। पूर्व ब0स0पा0 सरकार एवं केन्द्र सरकार की मिलीभगत से वर्ष 2009 से 2012 तक लगभग 3.00 लाख मिटरीक टन से अधिक कोयले की खरीददारी दस गुने दर पर इण्डोनेशिया से की गयी । और भारत के ही ठेकेदार इण्डोनेशिया में जाकर भारत को कोयले का निर्यात किये । व्यवहारिक दृष्टिकोण से इण्डोनेशिया से कोयला मॅगाना सही नही था। ऐसे राज्य जो समुद्रतट के नजदीक नही थे ढुलाई में भी लूट की गयी। यहॉ यह भी बताना आवश्यक है कि हमारी मशीनो की डिजाईन के अनुसार सी एवं एफ ग्रेड के कायले की जरुरत होती है जिसकी कैलोरिफिक वैल्यू 1800-2000 होती है जबकि आयातीत कोयले की कैलोरिफिक वैल्यू में तीगुने का फर्क है हमारे पास कोई मिक्सिग मशीन नही थी जिसको मिलाकर कोयले का उपयोग किया जा सके फिर कैसे अन्जाम दिया गया यह जॉच का विषय है? अब हम अन्य घोटाले जो लगभग 50 हजार करोड़ से अधिक का है जिन व्हिसल ब्लोअर ने अपने जान पर खेल कर यह खुलासा किया उनको हम नमन करते है। अब हम सपा,बसपा एवं काग्रेस के घपलो घोटालो के दस्तावेजी सबूत रख रहे हैः-

 

1. रुपये 5000 करोड़ के घोटाले की सीबीआई जॉच की अधिसूचना दिनंाक 2.3.2008 जारी होने के बाद कॉग्रेस सरकार ने सीबीआई जॉच नही होने दिये अपितु इस मामले को यह कहकर टाल दिये कि सीबीआई के पास ऐसी जॉचो की तकनीकी विशेषज्ञता नही है। तथा प्रदेश सरकार घोटालेबाजो के नाम नही बता रही है तथा इसमें कोई अन्तर्राष्ट्रीय प्रसार नही है। जबकि आई0जी0 विजिलेन्स ने अन्तर्राष्ट्रीय साजिश जो पैड का इस्तेमाल कर करोड़ो की लूट को देखते हुए सीबीआई जॉच की संस्तुति की तथा उ0प्र0राज्य सतर्कता अधिष्ठान ने यह लिखकर भाग लिये कि ’’ग्लोबल टेण्डर में पारदर्शी प्रक्रिया नही अपनायी गयी तथा जो बीड डाक्यूमेण्ट विदेशी कम्पनी को बेची गयी अनुबन्ध करते समय विदेशी कम्पनी एवं अन्यो को लाभ पहुॅचाने के उद्वेश्य से महत्वपूर्ण क्लाजो को हटाया गया। यही नही विदेशी कम्पनी ने मात्र पैड का उपयोग कर अरबो रुपये इस देश से ले गयी इस ग्लोबल टेण्डर में प्री क्वालिफाईग क्राईटेरिया यह निर्धारित थी कि जिसके पास दो टीएसई मशीन(Tension stringing equipment) होगी वही कम्पनी भाग ले सकती है। विदेशी कम्पनी दक्षिण कोरिया से कोई टीएसई मशीन नही ले आयी वह अपने कोलेेैब्रेटर संस्था की एक मशीन से ही कार्य किये जिससे कार्य में देरी हुई। यही नही इस मध्य जॉच को रोककर रुपये 220 करोड़ का फर्जी भुगतान कराया गया। तथा इस जॉच को 13 बार बदला गया। अनुबन्ध में यह शर्त थी कि कार्य में देरी की जिम्मेदारी विभाग पर आती है तो 20 प्रतिशत मूल्य विचलन का भुगतान ठेकेदार को किया जायेगा। यदि देरी की जिम्मेदारी विदेशी कम्पनी पर आती है तो 20 प्रतिशत मूल्य विच.लन का भुगतान नही किया जायेगा और अधिकतम 10 प्रतिशत पेनाल्टी लगाई जायेगी। जब विदेशी कम्पनी से 3 प्रतिशत पेनाल्टी काट ली गयी तो 20 प्रतिशत मूल्य विचलन का भुगतान कैसे किया गया? इस सम्बन्ध में जॉच संख्या वीसी 03/2009 की जॉच रिपोर्ट जिसमें मात्र 03 फाउन्डेशन पर हुई शेष 1000 से अधिक फाउन्डेशन की जॉच ही नही होने दी गयी। यहॉ यह भी बताना आवश्यक है कि 800/400 के वी सबस्टेशन एवं पारेषण लाईन 500 वर्षो के रिटर्न पिरीयड की थी। इस घोटाले में सपा बसपा एवं केन्द्र की कॉग्रेस सरकार ने जमकर लूट की। अब भी 30 विषयो पर जॉच नही हो पायी है।

2. रुपये 30 हजार करोड़ के घोटाले में शामिल महत्वपूर्ण व्यक्ति श्री राजेश अवस्थी ,अध्यक्ष ,उ0प्र0विघुत नियामक आयोग को माननीय उच्च न्यायालय एवं मा0 सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 में ही अवैध नियुक्ति करार देते हुए बर्खास्त कर लिखे कि “It has been vehemently emphasized by the petitioner ‘s counsel that higher tariff rate suffers from extraneous reasons and the matter may be referred for investigation to CBI ,but we are not inclined to interfere in the present case, being a petition for quo warranto .Issue is left open for adjudication by the appropriate forum” वर्तमान समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस घोटाले में तत्कालीन बसपा सरकार को लिप्त पाते हुए मा0सर्वोच्च न्यायालय में अपनी एसएलपी(सी) 1550/2012 वापस ली। जब इसकी जॉच हेतु अनुरेाध किया गया तो राष्ट्र भाषा हिन्दी में दिये गये दस्तावेजी सबूतो को अग्रेजी रुपान्तरण करने हेतु दिनंाक 21.8.2012 को लिखे। जबकि सरकार की मंशा यह थी कि इसकी जॉच ही न हो क्योकि उन्हे भी यही करना है। वर्तमान सपा सरकार हिन्दी की धज्ःिजयॉ कैसे उड़ाती है इससे भी साबित होता है । उ0प्र0विघुत नियामक आयोग का कार्य बिजली क्षेत्र में गुणवत्ता लाने उत्पादन बढाने तथा सुधार लाने एवं बिजली की दर तय करने हेतु यह संस्था बनायी गयी है यही कार्य वर्तमान अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा भी कर रहे है । पिछले 10 वर्षो में प्रतिमाह किन किन बिजली कम्पनियो से किस दर पर कितने मूल्य की बिजली खरीदी गयी अबतक लगभग रुपये 2.00 लाख करोड़ से अधिक का घोटाला किया गया है।

3. रुपये 1600 करोड़ का राजीव गॉधी ग्रामीण विघुतिकरण योजना में खुली लूट समाजवादी पार्टी के छुट्टा साड़ एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री जी ने तीगुने चौगुने दर पर दक्षिण भारत एवं अन्य कम्पनियो को जो इस क्षेत्र में भिज्ञ नही थी कराया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मा0मायावती जी ने जॉच का नाटक कर इस जॉच को दो वर्षो तक घुमाती रही बाद में पूर्व सरकार को बचाने हेतु जॉच संख्या 242/2009 द्वारा उ0प्र0राज्य सतर्कता अधिष्ठान को सौपी गयी जैसे ही वर्तमान मुख्यमंत्री जी को मालुम हुआ कि उनके पिता भी इस घोटाले में शामिल है जॉच नही होने दी गयी। अैार जब जॉच के सम्बन्ध में प्र्रगति रिपोर्ट मॉगी गयी तो देने से इन्कार कर दिया गया।

4. उ0प्र0 जल विघुत निगम में रुपये 750 करोड़ का घोटाला एवं निगम को साजिशन घाटाा में डालकर बेचने हेतु गलत टैरिफ दिखाकर क्षति पहुॅचाते हुए कारपोरेट जगत को देने का षडयऩ्त्र तत्कालीन ब0स0पा0 सरकार ने किये । निगम के सलाहकार ने अपने पत्र दिनांक 22.10.2011 को लिखे कि “ Ministry of power ,Government of India order No 42/7/2000 R&R dated 5-11-2001 had the same been adopted by us it would have caused irrepairable loss of UPJVNL,due to lesser fixation of Tariff by UPERC.”
यही नही कमीशन की लालच में उ0प्र0जल विघुत निगम लि0 को रुपये 500 करोड़ से अधिक की क्षति पहुॅचायी गयी एलआईसी लोन उ0प्र0राज्य विघुत उत्पादन निगम लि0 पर बकाया रुपये 3010.28 करोड़ था तथा उ0प्र0जल विघुत निगम लि0 पर 300 करोड़ था। एलआईसी ने चन टाईम सेटिलमेण्ट हेतु उ0प्र0राज्य विघुत उत्पादन निगम लि0 को रुपये 500 करोड़ जमा करने पर शेष राशि माफ करने हेतु लिखा तथा तथा उ0प्र0 जल विघुत निगम लि.0 को रुपये 75.41 करोड़ एक मुश्त देने पर शेष राशि माफ करने हेतु लिखा। उत्पादन निगम ने पीएफसी से रुपये 500 करोड़ लोन लेकर एलआईसी को भुगतान कर दिये परन्तु जल विघुत निगम के पास रुपये 130 करोड़।

फिक्स डिपाजिट होते हुए भी कमीशन की लालच में एलआईसी को भुगतान नही किये। अब यह राशि बढकर रुपये 500 करोड़ से अधिक की हो गयी है। अर्थात टैरिफ में 250 करोड़ एवं दोहरा मापदण्ड अपनाने के कारण 500 करोड़ से अधिक की क्षति हुई।

5. रुपये 7000 करोड़ की लूट में शामिल ब0स0पा0 एवं सपा अभी तक कोई हिसाब नही दे पायी है तथा प्रतिवर्ष रुपये 450 करोड़ के राजस्व की हानि के दोषी अधिकारियो के विरुद्व कोई कार्यवाही नही हो पायी जबकि हलफनामा भी सरकार के पास है। घटिया एवं अधोक्षमता वाले 132/220 के0वी0 के सबस्टेशन के निर्माण का कार्य टर्न की के आधार पर कोई अर्हैता न रखने वाली उ0प्र0राजकीय निर्माण निगम एवं उ0प्र0जल निगम को दिया गया। यह घोटाला उ0प्र0पावर ट्रान्समिशन कार्पोरेशन लि0 में तीगुने से अधिक रेट पर कार्य कराया गया। जब इन सबस्टेशन को टेक ओवर किया गया तो मैटेरियल रिकन्साईलेशन नही हुआ साथ ही टोटल वैल्यू एक्सपेन्डिचर का कोई विवरण भी नही है यह घोखाधड़ी अत्यन्त उच्च स्तर पर हुआ है । यही नही सामान की खरीददारी प्राईवेट फर्मो से की गयी जिससे निगम को वित्तिय क्षति भी हुई । इस कार्य को अन्जाम लखनऊ मुख्यालय से किया गया। फिल्ड अधिकारियो को कमीशन न मिलने के कारण वे सभी चुप्पी साधे रहे । यही नही निदेशको की नियुक्ति में भी बड़ी धॉधली की गयी इस पर भी सरकार के पास हलफनामा है यही नही जो ट्रान्सफार्मर लगके अब धीरे धीरे जल रहे है । बड़ी खुबसूरती से 240एमबीए का ट्रान्सफार्मर जो लगभग 12 करोउ़ का है लूटने हेतु 36वर्ष पुराना ट्रान्सफार्मर लगाया गया । जलने के बाद उस ट्रासफार्मर की कीमत रुपये 1.40 करोड़ ऑकी गयी।

6. उ0प्र0 जल विघुत निगम लि0 में हुए रुपये 100 करोड़ से अधिक के घोटाले

ब0स0पा0 के कार्यकाल में हुआ जिसको सपा सरकार संरक्षण प्रदान कर रही है। इस गम्भीर प्रकरण में सचिव(ऊर्जा) की जॉच रिपोर्ट 2006 में आ गयी थी तथा दोषी अधिकारियो एवं अन्यो के विरुद्व अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु शासन से सीएसआर 351ए के तहत अनुमति मॉगी गयी थी तथा सबको कारण बताओ नेाटिस जारी किया गया था तथा मा0उच्च न्यायालय ने कोई राहत नही दिये। पूरे प्रकरण में शासन के ऊर्जा विभाग का आचरण संदिग्ध है क्योकि सभी दस्तावेज वही से गायब हुआ था। अब पुनः मा0 प्रधानमंत्री जी के आदेश से उ0प्र0राज्य सतर्कता अधिष्ठान को भेजी गयी है।

 

7. ब0स0पा0 सरकार में विभिन्न विधुत परियोनाओ एवं अन्य स्थानो पर हुए पेड़ घोटाले

ब0स0पा0 के कार्यकाल में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 10 करोड़ पेड़ लगाने का निर्णय लेकर फर्जी पेड़ दिखाकर करोड़ो डकारे गये। यह रकम बकायदे उच्च राजनीतिक हस्तियो को पहुॅचाया गया। जिससे यह मामला दबा रहा । लगातार वन विभाग एवं अन्यो द्वारा उापलब्ध कराये गये सााक्ष्यो के विरोधाभासी होने के कारण जिलाधिकारी ललितपुर से जॉच कराने हेतु कहा गया तो उसकी जॉच रिपोर्ट दिनंाक 1.9.2012 से पता चला कि मात्र 10 प्रतिशत पेड़ ही उपलब्ध हुए 90 प्रतिशत पेड़ फजी्र पाये गये पूरे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में एक ही स्थान पर वितरण कम्पनियॉ एवंज ल विघुत परियोजनाओ के अधिकारी एवं वन विभाग भी लगाता रहा ओर स0पा0 भी इसी में मस्त रही तथा दोषी अधिकारियो को बचाती रही है।

8. ब0स0पा0/स0पा0 सरकार में लखनऊ में भूमिगत कैबिल द्वारा विघुत आपूर्ति में 100 करोड़ से अधिक का घोटाला। विधंुत प्रणाली सुधार योजना के अन्तर्गत विश्व बैक से रुपये 70 करोड़ एवं यू0पी0पावर कार्पोरेशन लि0 से 32 करोड़ आवंटित हुए जो लखनऊ के क्षेत्र यूपीआईएल,राजेन्द्र नगर, अमीनाबाद हनुमान सेतु ,शिवाजी मार्ग विक्टोरिया,नीबू पार्क आदि में एल0टी0 लाईन लगभग 465 किमी0 एवं 33 के0वी0 एवं 11 के0वी के 116 किमी भूमिगत कैबिल बिछायी गयी जो आजतक चालू नही हो पायी क्योकि अधिकतर कागजो पर किया गया । इस कार्य को भी राजकीय निर्माण निगम द्वारा ही कराया गया था।

9. ब0स0पा0/स0पा0 सरकार का सह अस्तित्व कम्पनी बनने के पहले ही दे दिये 05 ठेके उपरोक्त दोनेा सरकारे विकास को लेकर काफी चिन्तित है और बिजली को लेकर राज्य में भीषण मारामारी है। उत्तर प्रदेश की18 परियोजनाऐ ठप्प पड़ी है। मंजूरी की सभी औपचारिकताऐ पूर्ण है। तथा करार भी हो चुका है। 28 जनवरी ,2011 को निविदाये आमंत्रित की गयी एवं 28 फरवरी 2011 को प्री बिड मीटिग में मेसर्स ओमनीज इंफ्रा पावर लिमिटेड को 30 मेंगावाट बिजली उत्पादन करने के लिये पीलीभीत में माधो-1 एवं 2,बिजनौर में रामगंगा ओर ललितपुर में बंदरैान समेंत 5 लघु विघुत परियोजनाओ के ठेके दे दिये गये ओर एक महिने बाद दिनंाक 18.3.2011 को मेसर्स ओमनीज इंफ्रा पावर लि0 अस्तित्व में आई। बिड डाक्यूमेण्ट में यह निर्धारित था कि कम्पनी कम से कम 10 वर्ष पुरानी हो तथा उसके पास तीन वर्ष का आडिटेड एकाउन्ट होना चाहिये। जब कम्पनी ही नही थी तो किसके कहने पर यह अनोखा कार्य किया गया आजतक उसपर कोई काम ही नही हो पाया तथा उसने कितना कितना ऋण कहॉ कहॉ से प्राप्त किया?

10. ब0स0पा0 एवं स0पा0 की सरकार द्वारा उनके मंत्रियो ने अपने विभागो से सरकारी चार पहिया वाहन लेकर अपने अपने क्षेत्रो में लगाने में महारत हासिल किये है अकेले श्री रामवीर उपाध्याय तत्कालीन ऊर्जामंत्री ने सभी निगमो से 20 से अधिक गाड़िया जबरन लिये थे अब यही कार्य्र स0पा0 के मंत्री भी कर रहे है। इनके ऐशो आराम की सीमा खत्म ही नही होती उन्होने निगम से करोड़ो के सामान जेसे एसी,फ्रीज कलर टीवी आदि भी लिये है। तथा उन्होने बकायदे विजिलेन्स टीम के साथ छापा डाले और 70 करोड़ की बिजली चोरी पकड़ी गई परन्तु भारी रकम लेकर वसूली के नाम पर कुछ नही किये । वर्तमान होम गार्ड मंत्री ने भी यही किया है तब तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक ने आवाज उठायी तो उन्हे स्थानान्तरित कर दिया गया। इसी प्रकार का कार्य सभी मंत्रियो द्वारा किया जा रहा है।

11. ब0स0पा0 सरकार का घाराशायी चिमनी घोटाला जिससे लगभग रुपये 600 करोड़ की क्षति हुई उ0प्र0राज्य विघुत उत्पादन निगम लि0 में 2 /250 मेेगावाट परीक्षा विस्तार तापीय परियोजना की निर्माणााधीन चिमनी धाराशायी होने के प्रकरण में गम्भीर साजिश जिसमें सीबीसी नार्मस के विपरित टेण्डर एवं डिजाईन में हेराफेरी की गयी जिसमें मेंसर्स एनबीसीसी की कार्यप्रणाली आोर उनके सत्य निष्ठा पर प्रश्न चिन्ह सिद्व किया गया है। मेसर्स एनबीसीसी ने अगस्त 2007 में एक ड्रााईग जारी की जिसमें नीव में 456 पाईल ,42.5 मीटर की गहराई की गोलाकार रेक्ट 4.25मीटर मोटाई रखी गयी तथा स्वायल इन्वेस्टिगेसन के आधार पर यह तय किया कि “ The pile cap need not be uniform thickness.Tampering of pile cap shall be permitted as per design requirement” पाइप की संख्या कम की गयी तथा प्राईसबीड में सबसे न्यूनतम गैमन को इसलिये नही दिया गया ताकि घोटाला किया जा सके। इस प्रकरण में उत्पादन क्षति रुपये 600 करोड़ से अधिक का हुआ है।

12. खोदरी जल विघुत गुह पर विभाजन के समय दावा प्रस्तुत न करने के कारण रुपये 6000करोड़ की क्षति उत्तर प्रदेश के बॅटवारे के बाद बने उत्तराखण्ड में परियोजनाओ के बॅटवारे आदि पर भारत सरकार के गाईड लाईन एवं भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के पत्र संख्या 42/7/2000 दिनंाक 5.11.2001 में यह निर्णय लिया गया था कि जिसकी जितनी परियोजनाऐ विभाजन के समय जहॉ पर होगी वह परियोजना उसी प्रदेश की होगी। यही कार्मिको के सम्बन्ध में भी हुए के अनुपालन में खोदरी जल विघुत गृह हिमांचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है। जिसकी क्षमता 120 मेंगावाट (30ग4द्ध जिसमें लगभग 400 मिलियन से अधिक का उत्पादन होता है वर्ष 2001 से यह विघुत उत्तर प्रदेश को नही प्राप्त हो रहा है। जिसके कारण अबतक रुपये 6000करोड़ से अधिक की क्षति हुई है। इसके निर्माण में सम्पूर्ण व्यय जो लगभग रुपये 600 करोड़ था उत्तर प्रदेश सरकार ने वहन किया था। मेंरे द्वारा लगातार इस सम्बन्ध में वर्ष 2002 से पत्राचार किया गया परन्तु उच्च अधिकारियो ने कामिनी कॉचन मे लिप्त रहने के कारण इसका पालन नही किया। यही नही मेंरे द्वारा लगातार लिखने के कारण मेंरे विरुद्व साजिश कर फर्जी प्राथमिकी दर्ज करवाकर मुझे जेल भिजवा दिया गया जिसपर माननीय उच्च न्यायालय ने सम्पूर्णता में फर्जी पाते हुए निरस्त कर दिये। उपरोक्त परियोजना के सम्बन्ध में जब सूचना मॉगी गयी तो तत्कालीन मुख्य सचिव एवं वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी ने कोई सूचना नही दिलवाये आज भी शासन के ऊर्जा विभाग एवं सिचाई विभाग में यह प्रकरण लम्बित है। और दोनो के आचरण संदिग्ध है।

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