यूपी चुनाव में भाजपा नेतृत्व की “पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक”

कुंवर अशोक सिंह राजपूत

‘पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक’ सत्ता के दरवाजे तक पहुँचने के लिए बेहद जरूरी और सटीक तरीका है, आगामी विधान सभा के नजरिये से उत्तर प्रदेश भाजपा में विरोधी दलों के बाहरी-परदेशी सहित दलबदलू और एन-केन तरीके से सत्ता के सदैव साथ में रहने के आदी राजनीतिक-परिंदे भाजपा की ठूंठ हो रही डालियों पर अपना जमाव और कब्जा बनाने में जोर से लग गए हैं। 2017 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के शुरू होने जा रहे घमासान में भाजपा के वनवास के निश्चित समाप्त होने के नरहे माहौल के साफ़ से दिखलाई देने के बाद से भाजपा में दो दर्जन से ज्यादा बसपा, रालोद, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बड़े नेता और विधायक विगत 3-4 महीनों में साम्प्रदायिक भाजपा में शामिल हो भगवा खेमे की रेटिंग में बढ़ोतरी कर महती भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हालाँकि जमीनी तौर पर भाजपा के भीतर और बाहर के प्रवासी भी मोदी नाम से ही विधायक चुनाव में सफलता पाएंगे। उधर भाजपा नेतृत्व की इस सर्जिकल स्ट्राइक से बसपा काफी आहत है।

भाजपा विरोधी दलों के अंदर की गई “पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक“ सेंधमारी को राजनीतिक नजरिये से देखा जाये तो भाजपा नेतृत्व द्वारा बसपा, रालोद, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में विधान सभा चुनाव की दृष्टि से सफल पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक करना करार दिया जा रहा है। हालाँकि भाजपा का कोर कार्यकर्ता भाजपा नेतृत्व की “पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक“ तोड़-फोड़ से ज्यादा खुश नहीं है और फिलहाल संघी विचार वाले भाजपा कैडर ने मुखरता से दलबदुओं का विरोध के बजाय भाजपा की सरकार कायम कराने के नजरिये से रणनीतिक चुप्पी बना रखी है। भाजपा नेतृत्व की “पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक“ के नाम पर बसपा, रालोद, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में की गई सेंधमारी और तोड़-फोड़ को हिट आईडिया समझ “पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक“ के क्रम को प्रत्याशियों के नामांकन प्रक्रिया के अन्तिम समय तक जारी रखने की तैयारी कर रखी है। माना जा रहा है कि टिकट की औपचारिक घोषणा हो जाने के बाद भी 4 से 6 सीटों पर बाहरियों को कमल निशान थमा देने से इंकार नहीं किया जा सकता।

इसी क्रम में एनसीआर-बुलंदशहर से कई बार सांसद रहे अशोक प्रधान कल्याण सिंह के वीटो कारण 2009 में भाजपा को छोड़ समाजवादी पार्टी में सम्मलित हो गए थे। उन्होंने भाजपा में घर वापसी कर ली है। मुलायम परिवार की बड़ी बहू डिम्पल यादव की लोकसभा में जीत सुंनिश्चित करने के लिए आगरा के दिग्गज ठाकुर नेता भाजपा सरकारों में मंत्री रहे राजा अरिदमन सिंह को भाजपा को छुड़वाकर सपा मुखिया मुलायम ने सपा में शामिल किया था। अखिलेश सरकार में मंत्री रहकर बर्खास्त हुए राजा भदावर अरिदमन सिंह और उनकी पत्नी को सपा के दोनों खेमों से पुनः टिकट मिला था अब आगरा के राजा रानी ने भाजपा में घर वापसी की है।

घर वापसी और सेंधमारी का राजनीतिक अर्थ चुनावी समर में सत्ता में आने के लिए जीतने के लिए निश्चित जीत के टोटके समझ रखने वालों का साफ़ कहना है राजनीतिक विज्ञान की दूरदृष्टि समझ रखने वाले ऐसे प्रवासी दिग्गज दूसरे दलों के नेता और विधायक सफलता से पाला बदल कर लेते हैं। क्योंकि वह सत्ता में रहने के आदी होते हैं और राजनीतिक बदलाव की समझ उनमें विशेष होती है। भाजपा नेतृत्व की “पोलिटिकल सर्जीकल स्ट्राइक“ का शुरू हुआ क्रम बसपा के नामचीन नेता रहे स्वामी प्रसाद मौर्य, उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी और दिग्गज राजनेता की पुत्री और इलाहाबाद की पूर्व मेयर लखनऊ कैंट से विधायक रीता जोशी बहुगुणा के अलावा, अजित सिंह की अगुवाई वाले रालोद के विधायक दल के नेता अलीगढ़-बरौली से कई बार विधायक और पूर्व मंत्री ठाकुर दलबीर सिंह की भाजपा में शामिल करा लेने से अलीगढ़ मण्डल और पश्चिम उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपने विरोधी दलों पर वोटों के गोलबंदी से राजनीतिक बढ़त निश्चित होगी और 10 प्रतिशत तक के अनिर्णय वाले फ्लोटिंग वोटर की दिशा और मनसा को आखि़री छड़ों में निश्चित प्रभावित भी करते हैं।

भाजपा ने बाहरी दलों की सेंधमारी से पूर्व उनके क्षेत्रीय क्षत्रप और सामाजिक (जातीय) समीकरण का तालमेल वोटों के खातिर बिठाया है। हालांकि बाहरी लोगांे को टिकट देने के प्रति भाजपा नेतृत्व की सफाई यह है कि उ.प्र. में 100 से ज्यादा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने का रिकार्ड उपलब्ध हैैं। ऐसी कमजोर सीटों पर दूसरे दलों से कथित बाहरियों को उनके सामाजिक, जातिगत और सफलता की मजबूती के विषय को ध्यान में रखकर भाजपा प्रत्याशी बनाती है, तो इसे गलत नहीं कहा जायेगा।

(लेखक कुंवर अशोक सिंह राजपूत, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार हैं। उपर्युक्त लेख लेखक के निजी विचार हैं। )

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