• रवांडा से कन्नौज आएगा शोध दल, द्विपक्षीय समझौते के आसार

  • पचौली व लेमनग्रास से तेल निकालने पर होगा फोकस

Perfumes in Kannauj
Perfumes in Kannauj

देश और दुनिया में इत्र और इतिहास के क्षेत्र में पहचान रखने वाले कन्नौज की खुशबू (Perfumes) अब रवांडा देश में सुगंध के कारोबार को नया स्वरूप देगी।

निर्यात पर दोनों देशों के बीच समझौते की उम्मीद जताई जा रही है। सुगंध (Perfumes) एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) ने इस दिशा में अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।

विशेष बात यह है कि एफएफडीसी के मुख्य कार्यालय कन्नौज, सहयोगी केंद्र कानपुर, ओडिशा के गंजाम व मणिपुर के इंफाल से जुड़े विशेषज्ञों व प्रशिक्षकों के जरिए रवांडा के युवाओं, कारोबारियों को गुर सिखाने पर सहमति भी बन गई है।

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रवांडा की राजधानी किगाली में नेशनल एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट डेवलपमेंट बोर्ड (एनएईबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एबी कयोंगा, ईएसएस स्वायल लिमिटेड की लिडा कि लबा के साथ एफएफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ला, सहायक निदेशक एपी सिह ने 22 से 27 अक्टूबर तक पांच दिन तक इस विषय पर मंथन किया है।

दोनों देशों के विशेषज्ञों के बीच गुलाब के विकल्प जिलेनियम, पान मसाला में इस्तेमाल होने वाले पचौली व लेमन ग्रास का तेल निकालने पर फोकस रहा।

रवांडा में बहुतायत में पाए जाने वाले टी ट्री, यूकेलिप्टस व गेंदा के पौधों की जानकारी देकर वहां के विशेषज्ञों को तेल निकालने के गुर भी सिखाए।

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वहां 117 हेक्टेयर भूमि पर बने हर्बल गार्डन की व्यवस्थाएं देखी। अब देश के सुगंध प्रशिक्षक अगले दो वर्ष तक रवांडा में कारोबार, इसेंसियल ऑयल, पौधों व पत्तियों से तेल निकालने के गुर सिखाएंगे।

इसके बाद निर्यात पर द्विपक्षीय समझौते से बड़े बाजार का रास्ता खुलेगा सहायक निदेशक एपी सिंह के मुताबिक  पिछले दिनों रवांडा से लिंडा कलिबा कन्नौज प्रशिक्षण लेने आई थीं।

उनकी देखरेख में 117 एकड़ जमीन पर एफएफडीसी से प्रशिक्षित डिज-रे ने सुगंध कारोबार को बढ़ावा दिया है। इस हर्बल गार्डन में औषधीय पौधों, वनस्पतियों से लेकर अलग-अलग तरह के तेल निकालने वाले पौधे लगाए गए हैं।

रवांडा में इसेंसियल ऑयल कारोबार पर फोकस के लिए शोध दल जल्द कन्नौज में सात दिन तक तकनीकी जानकारियां लेकर लोगों को आर्थिक मजबूती के लिए इससे जोड़ेगा।

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उधर एफएफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ला का कहना है कि ‘सुगंध कारोबारियों को इससे रवांडा में बड़ा बाजार मिलेगा। रोजगार के दरवाजे खुलेंगे।

साथ में निर्यात बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं। एमएसएमई मंत्रालय की पहल पर नया इतिहास रचने की तरफ यह बड़ा कदम है।

सुगंध कारोबारियों को इससे रवांडा में बड़ा बाजार मिलेगा। रोजगार के दरवाजे खुलेंगे। साथ में निर्यात बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं। एमएसएमई मंत्रालय की पहल पर नया इतिहास रचने की तरफ यह बड़ा कदम है।

– शक्ति विनय शुक्ला, प्रधान निदेशक, एफएफडीसी