धन्वंतरि दिवस यानि धनतेरस (Dhanteras) के दिन को धन अर्जित करने वाला शुभ दिवस माना जाता है1 इस दिवस पर सोने एवं चांदी के जेवरात, सम्पत्ति, भूमि एवं बर्तन खरीदने की प्राचीन परम्परा है, जो आज भी कायम है। लोक मान्यता है कि धनतेरस के दिन घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है। धनतेरस (Dhanteras) पर सोना, चाँदी के जेवरात, सम्पत्ति, भूमि एवं बर्तन खरीदने की प्राचीन परम्परा है, अब फर्क इतना आया है कि पहले सालभर के लिए खरीददारी होती थी।

good day to earn money is dhanteras
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अब रस्म अदायगी के लिए खरीददारी करते हैं। धीरे-धीरे यह परम्परा का आधुनिकीकरण होता जा रहा है। आधुनिक युग में अब गरीब से धनवान तक सभी इस दिवस को अपने-अपने अंदाज में मनाने की कोशिश करते है1 धनतेरस पर हर लोग अपनी क्षमता के अनुसार खरीददारी करते है। कोई बर्तन खरीदने में विश्वास रखता है, तो कोई आभूषण, मकान, वाहन एवं भूमि खरीदता है। यानि कुछ भी खरीददारी हो जाये। पुरानी परम्परा और नये विचार के बीच समृद्धि के लिए इस दिन खरीददारी करने को सर्वोत्तम दिन माना जाता है।

धनतेरस की पहचान भगवान धन्वंतरि के जन्म दिवस से बनी है। धनतेरस को चिकित्सीय प्रणाली प्रणेता एवं आदिकाल के वैद्य के रूप में प्रख्यात भगवान धन्वंतरि के पूजा-अर्चना के लिए भी जानी जाती है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के त्र्योदशी तिथि के दिन ही भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, जिसे हम धनतेरस के रूप में मनाते है। लोकमान्यता है कि जिस तरह वैभव की देवी लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थी, उसी प्रकार भगवान धन्वंतरि भी सागर मंथन से ही उत्पन्न हुए थे।

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जब वे प्रकट हुए थे, तो उनके दोनों हाथों में अमृत से भरा कलश था। इसी लिए आज के दिन को बर्तन खरीदने की परम्परा भी है। भगवान धन्वंतरि की पूजा से घर में धन का आगमन होता है और परिवार में स्वस्थ एवं समृद्धि आती है। भगवान धन्वंतरि देवताओं के वैद्य और चिकित्सा के देवता माने जाते है।

इसी लिए चिकित्सकगण भी धनतेरस के दिन को महत्वपूर्ण मानते है। ऐसा माना गया है कि आज के दिन धन खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। आज के दिन चांदी खरीदने का प्रचलन होने के पीछे यह मान्यता है कि चांदी चन्द्रमा का प्रतीक है, जो शांति और शीतलता प्रदान करती है और मन को संतोष देती है। आज ही के दिन मिथिलांचल में गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदने की भी प्रथा है और लोगों ने खरीददारी भी की है।