नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत राजनीतिक नेताओं के खिलाफ रिश्वत के आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका की सुनवाई से न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ को अलग करने के वकील प्रशांत भूषण के आग्रह को गैरमुनासिब और बेहद अनुचित बताया। इस याचिका में साल 2012 में दो व्यावसायिक घरानों पर आयकर के छापों में कथित रूप से बरामद दस्तावेजों की जांच एसआईई से कराने की मांग की गई है। बता दें वर्ष 2012 में मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात से नाराजगी जताई कि एक एनजीओ के लिए पेश हुए वकील भूषण ने न्यायमूर्ति खेहड़ को सुनवाई से अलग करने की मांग करते हुए कहा कि उन्हें अगले प्रधान न्यायाधीश के रूप में नामित करने संबंधी फाइल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कार्यकारी के पास मंजूरी के लिए लंबित है।

भूषण ने न्यायमूर्ति खेहड़ की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि न्यायालय के एक अधिकारी के रूप में यह बात उठाना मेरा कर्तव्य है कि प्रधान न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने संबंधी न्यायमूर्ति खेहड़ की फाइल सरकार के सामने लंबित है। इससे नाराज न्यायमूर्ति खेहड़ और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने भूषण से कहा कि वह संवैधानिक संस्था पर संदेह कर रहे हैं और यह ठीक नहीं है। आप देश की सबसे बड़ी अदालत के बारे में बात कर रहे हैं। क्या आप सोचते हैं कि हम किसी दबाव में झुक सकते हैं? यदि आपको कोई परेशानी थी तो आपको इसका जिक्र करना चाहिए था। यह बहुत, बहुत अनुचित है। आप सर्वोच्च अदालत के बारे में बात कर रहे हैं। आप एक संवैधानिक संस्था पर संदेह कर रहे हैं। केन्द्र सरकार की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह सबसे ओछा हथकंडा है और सुप्रीम कोर्ट में ऐसा कभी नहीं हुआ। यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि जनहित याचिका में भी ऐसा किया गया है। मैं आहत हूं।