Bad Quality Food Dr. Ram Manohar Lohiya National Law University
Bad Quality Food Dr. Ram Manohar Lohiya National Law University

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (Dr. Ram Manohar Lohiya National Law University) में छात्र से हजारों रूपए लिए जाने के बाद भी मेस में उन्हें घटिया खाना परोसा जा रहा है। हालात यह है कि रात को करीब 20 फीसदी ही छात्र मेस में खाना खाते हैं। छात्रों का कहना है कि करीब 100 से अधिक शिकायत के बावजूद मेस के खाने की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा है।

मेस के खाने के मेन्यू के हिसाब से प्रत्येक छात्र को रोजाना पोष्टिक भोजन परोसा जाता है, पर हकीकत कुछ और ही है। पानी वाली दाल, कड़ी और जली हुई मैदे की रोटियां, सब्जी ऐसी की उसे देखकर ही खाने का मन नहीं करता। घटिया दर्जे का चावल भोजन थाल में छात्रों को आए दिन नसीब होता है। यही नहीं कई बार तो खाने में मक्खी भी निकली।

ये भी पढ़े: यूपी के हर जिले में खुलेंगे योगा वेलनेस सेन्टर

जिसकी शिकायत छात्रों की, पर आज तक मेस संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि आए दिन छात्रों के पेट खराब रहते हैं। छात्रों ने बताया कि रोजाना रोटी में आटा कम मैदा अधिक होता है। साथ ही ठीक से रोटी सिकी नहीं होती हैं। इतनी सख्त होती है कि मुंह दर्द होने लगता है। खाने में सोया बीन की बरी या आलू की सब्जी परोसी जाती है। उसमें भी कोई स्वाद नहीं होता है।

इसको पकाने में निम्न क्वालिटी का तेल और घटिया दर्जे की गाजर का प्रयोग किया जाता है। कभी कभी तो खाने का स्वाद इतना खराब हो जाता है कि खाना छोड़ देना पड़ता है। यहीं नहीं खाना बनाते समय साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता है। छात्रों का कहना है कि दिन में तो मेस में खाना खाना मजबूरी है,क्योकि दोपहर में लंच के बाद दो बजे से क्लास करनी होती है। खाने के लिए एक घंटा मिलता है। लिहाजा बाहर नहीं जा सकते हैं।

रात में 80 फीसदी छात्र बाहर खाते है खाना

जूनियर हो या सीनियर सभी छात्रों का कहना है कि रात का खाना तो और भी घटिया होता है। लिहाजा करीब 20 फीसदी छात्र ही मेस में खाना खाते हैं, जबकि 80 फीसदी छात्र रात में बाहर जाकर खाना खाते हैं। उनका कहना है कि बाहर कम पैसे में अच्छा और स्वादयुक्त खाना मिल जाता है।

मेस की फीस नहीं दी तो नहीं दे पाएंगे परीक्षा

विश्वविद्यालय में करीब 7 से 8 सौ छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। सभी को छात्रावास और मेस का शुल्क अदा करना अनिवार्य है। इसका खर्चा करीब 80 हजार रूपए के आस-पास बैठता है। इसमें करीब 28 हजार रूपए मेस के होते हैं। इसके बावजूद कानून के छात्रों को घटिया खाना खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि साल में मात्र आठ या नौ माह ही मेस में खाना खाते हैं। इस लिहाज से करीब 3 हजार रूपए महीना खाने का पड़ा।

ये भी पढ़े: परमवीर अब्दुल हमीद नौजवानों के प्रेरणाश्रोत : थल सेनाध्यक्ष

टोकन सिस्टम लागू हो

छात्रों की मांग है कि टोकन सिस्टम लागू किया जाए, ताकि जिस टाइम और जितने दिन खाना खाए उतने दिन का हम पैसा दें। यह सिस्टम जोधपुर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में चल रहा है। इससे खाने की गुणवत्ता अच्छी होगी।

रोजाना खाना खराब नहीं होता है, जब भी खराब खाने की शिकायत आती है तो मेस संचालक को गुणवत्ता को सुधारने के लिए कहा जाता है। यह मानते हैं खाने की गुणवत्ता में सुधार की गुंजाइश है। यह कहना सही नहीं है कि खराब खाने की वजह से ही रात में 80 फीसदी छात्र बाहर खाना खाने जाते हैं।

मानवेन्द्र तिवारी, वार्डेन, यूजी छात्रावास, लोहिया विधि विवि