Opinion

नोटबंदी: मियाद खत्म, करिश्मे की बारी

ऋतुपर्ण दवे कालाधन, राजनैतिक रसूख, डिजिटल लेन-देन और अपने ही सीमित पैसों के लिए कतार में छटपटाता 90 फीसदी बैंक खाताधारी आम भारतीय। शायद यही भारत की राजनीति का एक नया रंग है जो ’नोटबंदी’ के रूप में एकाएक, आठ नवंबर रात की आठ बजे अवतरित हुआ और सम्मोहन जैसा, चुटकी बजाते देशभर में छा […]

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विश्व की सभी समस्याओं का शान्तिपूर्ण समाधान है ‘भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51’

प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’, शैक्षिक एवं वैश्विक चिन्तक भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की मूल शिक्षा ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ की भावना पर आधारित भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 विश्व एकता का संदेश देता है। संविधान के अनुच्छेद 51 के अनुसार भारत का गणराज्य (क) अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करेगा, (ख) राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और […]

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बदले माहौल की चिन्ता

डा. दिलीप अग्निहोत्री डा. अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस का मायावती ने भरपूर फायदा उठाया। इस अवसर पर लखनऊ में आयोजित जनसभा को उन्होंने चुनावी रंग में बदल दिया। अपने को अंबेडकर का प्रमुख अनुयायी बताया। इसी के साथ अन्य सभी पार्टियों व नेताओं को अंबेडकर का विरोधी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ये बात […]

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अमृतसर सम्मेलन में अफगानिस्तान

डा. दिलीप अग्निहोत्री हार्ट ऑफ एशिया का विचार शांति, सुरक्षा, समृद्धि पर आधारित है। इसमें विभिन्न देशों के बीच आपसी सहयोग की भावना समाहित है। इसकी सफलता के लिए मानवतावादी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। भारत और अफगानिस्तान दोनों की भौगोलिक त्रासदी एक जैसी है। इनकी सीमाएं पाकिस्तान से लगती है। वह आतंकवादी देश है। […]

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कांग्रेस की तरफ क्यों खिंची जा रही है सपा?

स्नेह मधुर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने के जिस दावे के साथ रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की बागडोर अपने हाथ में ली थी, कांग्रेस में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के बाद अब उनकी दौड़ सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के पुराने और नये सुप्रीमो पिता मुलायम सिंह यादव और पुत्र अखिलेश यादव के इर्द-गिर्द […]

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बोलने से नहीं हिलती धरती

सियाराम पांडेय ‘शांत’ कांग्रेस के राष्ट्रीय  उपाध्यक्ष राहुल गांधी को मुगालता है कि अगर वे संसद में बोलेंगे तो देश में भूचाल आ जाएगा। उन्हें अपने राम की सलाह तो यही है कि वे चुप ही रहें। यह देश भूकंप नहीं चहता। भूकंप से लाभ तो होता नहीं, तबाही ही  बरपा  होती है। ऐसा बोलना […]

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देश के प्रत्येक वोटर की न्यूनतम मासिक आय निश्चित की जानी चाहिए!

प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’, शैक्षिक एवं वैश्विक चिन्तक एक समाचार के अनुसार लखनऊ के इटौंजा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गुलालपुर में 92 बच्चों को स्वेटर दिए गए। ठंड शुरू होने के साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे ठिठुरते हुए विद्यालय आ रहे थे। इस पर आध्यापिका कालिंदी सिंह ने साथी टीचर्स उत्कर्ष रघुवंशी, निशा […]

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जीने से बढ़ कर है जीवन का उद्देश्य

प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ मोहम्मद साहब के 12 दिसम्बर को तथा ईशु के 25 दिसम्बर जन्म के इस पवित्र माह में हम उनकी महान आत्मा को नमन करते हैं। इन दोनों महान आत्माओं ने भारी कष्ट सहकर अपना सारा जीवन लोक कल्याण के लिए जिया। मोहम्मद साहब ने कहा था कि हे खुदा, सारी खिल्कत […]

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तलाक पर अदातल का फैसला और राजनीति

प्रभुनाथ शुक्ल तलाक…!तलाक…!!तलाक…!!! तीन शब्दों के मकड़जाल में उलझा यह शब्द मुस्लिम पर्सनल ला और राजनीति के लिए गरमा-गरम मसला है। तलाक के गैर संवैधानिक और जायज होने पर सवाल उठते रहे हैं। हलांकि यह मुस्लिम जमात की महिलाओं की तरफ से ही उठाया गया। फिलहाल इस पर कोई आम सहमति नहीं बनती दिखती। मुस्लिम […]

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ग्रामीण महिलाओं की बढ़ रही सरकारी अस्पतालों तक पहुंच

देवानिक साहा साल 2004 से 2014 के बीच एक दशक में सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाली ग्रामीण महिलाओं की संख्या में 24 प्रतिशत वृद्धि हुई। थिंक टैंक, ब्रुकिंग्स इंडिया की एक हालिया रपट के अनुसार, एक देश के लिए यह महत्वपूर्ण है, जहां 50 प्रतिशत लोग चार गुना महंगी निजी चिकित्सा सेवा का लाभ […]

Life & Style Opinion

परमात्मा हमें वही चीज देता है जो हमारे हित की होती है!

डॉ. भारती गांधी प्रभु बच्चों की प्रार्थना जल्दी सुनते हैं:- प्रभु बच्चों की प्रार्थना पहले सुनते हैं। इस बात का एक उदाहरण यह भी है कि दक्षिण भारत में एक शहर है। वहाँ पर बहुत सालों से पानी नहीं बरसा था। किसी ने कहा कि यहाँ पर हम लोग प्रार्थना सभा का आयोजन करेंगे तो […]

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जयललित… 21वीं सदी की महामहिला!

ऋतुपर्ण दवे जयराम जयललिता, एक करिश्माई व्यक्तित्व, गजब का आकर्षण, लोगों का भरोसा और विश्वास कुछ यूं और इतना कि क्या बड़ा, क्या बूढ़ा, क्या पुरुष, क्या महिला सबने ’अम्मा’ का दर्जा दिया और वो महिला नहीं महामहिला बन गईं। अपनी इन्हीं विशेषताओं के चलते फिल्मी चकाचौंध से राजनीति में आने के बाद, खुद को […]

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ज्यादा छुट्टियों का मतलब आम आदमी का ज्यादा नुकसान

प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ डॉ. भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर 6 दिसंबर को प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश का ऐलान प्रदेश सरकार ने किया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में घोषित वार्षिक अवकाश 42 हो गए हैं। इन 42 वार्षिक अवकाशों में से 17 छुट्टियां ऐसी हैं जो जातीय आधार पर घोषित की गई हैं। […]

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संघर्ष ने बनाया जन-जन की अम्मा

रमेश ठाकुर जयललिता के साथ ही राजनीति के एक दुर्लभ अध्याय का मार्मिक व दुखद अंत हो गया। जयललिता अपने पीछे राजनीति का एक वृहद दर्शन शास्त्र छोड़ कर विदा हुई हैं। धूर्तता, मक्कारी और भ्रष्ट्राचार में लिप्त बदबूदार भारतीय राजनीति में भी जिस तरह अपनी वैचारिक सुगंध छोड़ कर जयललिता गई हैं वह स्वार्थी […]

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अब मोदी विरोध की तराजू पर सेना

सियाराम पांडेय ‘शांत’ सेना सुरक्षा के लिए होती है, राजनीति के लिए नहीं लेकिन इन दिनों जिस तरह सेना को बात-बेबात  राजनीति का विषय बनाया जा रहा है, उसे किसी भी लिहाज से उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह सच है कि केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सांप-सीढ़ी का खेल चल रहा है। विपक्ष […]

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देशभक्ति का उकेरा हुआ विचार है राष्ट्रगान

रमेश ठाकुर राष्ट्रगान महज मनोरंजन प्रयुक्त जुमला या गीत नहीं है। इसके गुनगुनाने मात्र से ही हमारे भीतर देशभक्ति का भाव जगता है। राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति जब हम सम्मान प्रदर्शित करते हैं तो इससे मातृभूमि के प्रति प्रेम और सम्मान झलकता है। 26 जनवरी, 15 अगस्त आदि विशेष दिनों तक ही इसे […]

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चौदह लाख करोड़ का गणित

चौदह लाख करोड़। सुनने में भारी-भरकम, गिनने में लगभग असंभव। चौथी कक्षा में जो गणित पढ़ा था उसकी सहायता ली तो समझ आया कि भारतीय गणना में यह राशि एक सौ चालीस खरब होती है। एक खरब याने सौ अरब। पहले हमारे बजट इत्यादि में अरब-खरब का प्रयोग किया जाता था, लेकिन यह परिपाटी न […]

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नोटबंदी में छिपा है देश भक्ति का संदेश!

– प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ लोग 500 और 1000 रूपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने को सरकार के स्मार्ट अभियान की तरह देख रहे हैं लेकिन लोग ब्लैक मनी को सफेद करने के लिए ओवर स्मार्ट तरीके खोजने की कोशिश भी कर रहे हैं। कहीं यह कोशिश ऐसे लोगों पर भारी न […]

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चुपके से एक मसीहा चला गया

घनश्याम भारतीय ‘ओढ़ कर मिट्टी की चादर बेनिशां हो जाएंगे, एक दिन आएगा हम भी दास्तां हो जाएंगे’ अपने जमाने के मशहूर शायर मरहूम इरफान जलालपुरी की यह पंक्तियां इस बात की प्रमाण है कि जिसने भी इस धरती पर जन्म लिया है उसे एक न एक दिन मृत्यु शैय्या पर शयन करना ही होगा। […]

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कालाधन के पक्ष में खड़े क्यों दिखाई दे रहे हैं कुछ नेता

काले धन पर मोदी के बड़े कदम (500 और 1,000 हजार रुपए के नोट बंद करना) का सबसे पहला सियासी असर अगले वर्ष पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश प्रमुख है। शायद इसीलिये धनकुबेरों के अलावा माया−मुलायम मोदी के इस फैसले से सबसे अधिक बौखलाए […]