फतेहपुर। मिड-डे-मील के तहत स्कूलों में फल वितरित कराने की योजना को धरातल में क्रियान्वित करने के लिए बेसिक शिक्षा (BSA) विभाग ने शासन से धन मांगा है।

Demands for money from BSA Administration
Demands for money from BSA Administration

मार्च माह से धन न आने से फल वितरण योजना सरकारी अभिलेखों में पंगु हो गई थी। ठंडे बस्ते में जा रही प्रक्रिया को जीवित करने के लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने वितरण के आदेश जारी किए तो बेसिक शिक्षा ने धन की मांग कर डाली।

बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा एवं मदरसों के बच्चों को मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा भेजी जाने वाली धनराशि से भोजन वितरित कराया जा रहा है।

मालूम हो कि तत्कालीन अखिलेश यादव की सरकार ने सोमवार के दिन सप्ताह में एक बार मौसमी फल वितरित करने के आदेश दिए थे। एक साल तक योजना बेहतर ढंग से चलती रही, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद फल वितरण योजना फ्लाप हो गई।

मार्च माह से फल वितरण में धन न आने के चलते मिड-डे-मील के जिम्मेदारों ने फल वितरण करने से हांथ खड़े कर दिए थे। हाल यह हुआ की योजना पंगु हो गई। कुछ जिम्मेदारों ने लखनऊ से आने वाली फोन काल में फर्जी तौर पर ही फल वितरण का संदेश दे दिया।

इसके बाद इन लोगों ने भी धनाभाव दिखाकर वितरण बंद कर दिया। शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए नवम्बर माह के दूसरे सप्ताह में शासन ने आदेश जारी करके फल वितरण के संशय के दूर कर दिया है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि फल वितरण का आदेश आते ही हर विद्यालय में फल वितरण योजना पूरी पारदर्शिता के साथ शुरू करा दी गई है।

फल वितरण के लिए शासन से 01 करोड़ 32 लाख रुपए मांगे गए हैं। ग्रांट आते ही विद्यालयों के खाते में भेज दिया जाएगा। वहीं फल वितरण योजना की जांच के लिए खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वह योजना की जांच करके रिपोर्ट दें।