चेन्नई। प्रधानमंत्री (PM) नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि मीडिया के पास समाज को बदलने की ताकत है और साथ ही मीडिया के ऊपर, निर्वाचित सरकार या न्यायपालिका जितनी समाजिक जवाबदेही भी है।

Government and judiciary accountability as well as on the media: PM
Government and judiciary accountability as well as on the media: PM

तमिल दैनिक अखबार ’दिना थांती’ के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में PM ने कहा, “संपादकीय स्वतंत्रता का उपयोग सार्वजनिक हित के लिए करना चाहिए और लिखने की स्वतंत्रता का मतलब ’तथ्यात्मक रूप से गलत लिखने की स्वतंत्रता’ नहीं है।“

महात्मा गांधी को उद्धरित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेस ’वास्तव में एक ताकत है, लेकिन इसका दुरुपयोग करना अपराध है।’

PM ने कहा, “आज, अखबार केवल समाचार नहीं देते हैं। वे हमारी सोच को आकार दे सकते हैं और विश्व के लिए खिड़की खोल सकते हैं। व्यापक संदर्भ में अगर कहें तो मीडिया समाज को बदलने का एक साधन है। इसलिए मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।“

उन्होंने कहा, “भले ही मीडिया प्रतिष्ठान निजी लोगों के स्वामित्व वाले हो सकते हैं, लेकिन वे जनहित के लिए काम कर रहे हैं। जैसा कि विद्वानों ने कहा है, यह(मीडिया) ताकत के बदले शांति से बदलाव स्थापित करने का एक जरिया है। इसी कारण इसपर चुनी हुई सरकार और न्यायपालिका जितनी जवाबदेही है।“

मोदी ने याद दिलाया कि किस तरह राजा राममोहन राय के ’संवाद कौमुदी’, बाल गंगाधर तिलक के ’केसरी’ और महात्मा गांधी के ’नवजीवन’ ने औपनिवेशिक काल में जनमत खड़ा करने और स्वतंत्रता संघर्ष के लिए प्रोत्साहित करने का काम किया था।

PM ने कहा, “आज, सभी नागरिक विभिन्न श्रोतों से मिली खबरों का विश्लेषण और पुष्टि करने की कोशिश करते हैं। इसलिए, मीडिया को अवश्य ही अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने चाहिए। विश्ववसनीय मीडिया संस्थानों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हमारे स्वस्थ लोकतंत्र के लिए भी अच्छा है।“

उन्होंने कहा कि इन दिनों अधिकतर मीडिया डिस्कोर्स(संवाद) राजनीति के आस-पास घूमता नजर आता है, लेकिन भारत सिर्फ राजनीतिज्ञों से नहीं बना है।

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मोदी ने कहा, “यह 125 करोड़ भारतीयों का भारत देश है। मुझे यह देखकर काफी खुशी होगी अगर मीडिया उनपर(जनता) और उनकी उपलब्धियों पर अधिक रपटें प्रकाशित करे।“