JNU officials not be blocked from admin block
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नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को यह सुनिश्चित करने का आज निर्देश दिया कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रशासनिक ब्लॉक में कुलपति और अन्य अधिकारियों को प्रवेश करते और निकलते समय रोका नहीं जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय में किसी भी तरह का धरना और प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए, लेकिन यह प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में आयोजित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस दोनों निर्देशों के अनुपालन के लिये जरूरत पड़ने पर अपने अधिकारों का उपयोग करे।

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने अदालत में मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बताया कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में उन्हें छात्रों के साथ किस तरह संवेदनशीलता से बर्ताव करना चाहिए। अदालत ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) को नोटिस जारी कर उसके पदाधिकारियों को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में उपस्थित होने तथा आंदोलन का कारण बताने का निर्देश भी दिया है। न्यायाधीश ने चूंकि यह मसला विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच रिश्तों से संबंधित है, इसलिए यूनियन के पदाधिकारियों की उपस्थिति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान बातचीत और मध्यस्थता से किया जाना चाहिए, न कि न्यायिक फैसले के जरिए।

छात्र जेएनयू की दाखिला नीति में हाल ही में किए गए बदलाव का विरोध कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इससे एमफिल और पीएचडी की सीटों में कटौती होगी। यह दाखिला नीति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा पिछले साल 5 मई को जारी अधिसूचना के अनुसार तयार की गयी है। जेएनयू प्रशासन ने छात्रों द्वारा प्रशासनिक ब्लॉक को अवरद्ध करने के विरोध में याचिका दायर की है। प्रशासन ने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय प्रशासन सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रशासनिक ब्लॉक में और उसके आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाएगी।’’ अदालत ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह 30 दिनों तक कैमरा की फुटेज को सुरक्षित रखें और जरूरत पड़ने या मांगने पर स्थानीय पुलिस को इसे उपलब्ध कराएं।