नई दिल्ली। राज्यसभा में BSP सुप्रीमो Mayawati ने मंगलवार को नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्‍हें वहां न तो सुना जा रहा है और न ही बोलने दिया जा रहा है इसलिए उन्‍होंने राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देने का फैसला किया है। Mayawati का समर्थन कांग्रेस ने भी किया और पार्टी नेता रेणुका चौधरी ने सवाल किया?, ‘एक दलित नेता को बोलने का अधिकार नहीं है? उन्‍होंने हाउस में नोटिस देकर बात करने का प्रयास किया।’ विपक्ष केे हंगामे के बीच राज्‍यसभा दोपहर तीन बजे तक स्‍थगित कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कथित दलित विरोधी हिंसा को लेकर अपनी बात जल्द खत्म करने को कहे जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने आज उच्च सदन में कहा, ‘‘मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दूंगी।’’ उपसभापति पीजे कुरियन ने उन्हें अपनी बात तीन मिनट में खत्म करने को कहा। इस पर मायावती नाराज हो गयीं और कहा कि वह एक गंभीर मुद्दा उठा रही हैं जिसके लिए उन्हें अधिक समय चाहिए।
कुरियन के रोकने पर उन्होंने यह भी कहा कि वह जिस समाज से संबंध रखती हैं, उस समाज से जुड़े मुद्दे उठाने से उन्हें कैसे रोका जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं दलितों के खिलाफ हो रही ज्यादतियों को लेकर अपनी बात ही सदन में नहीं रख सकती तो मुझे इस सदन में बने रहने का नैतिक अधिकार भी नहीं है।’’ उप सभापति ने कहा कि नियम 267 के तहत नोटिस देने पर ही वह चर्चा कर सकती हैं। इस नियम के तहत मुद्दे पर चर्चा के लिए अन्य कामकाज को स्थगित किया जाता है। अगर आसन सरकार की सलाह पर नोटिस स्वीकार कर ले और उस पर चर्चा के लिए सहमत हो जाए तब ही नियम 267 के तहत कामकाज निलंबित कर चर्चा की जा सकती है।
कुरियन ने Mayawati को समझाने की कोशिश की जो बेअसर रही। मायावती ने कहा कि अपने समुदाय के अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाने पर उन्हें सदन में बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा ‘‘मैं सदन से इस्तीफा देने जा रही हूं।’’ यह कह कर वह सदन से चली गईं। बसपा सदस्य पहले तो उनके साथ चले गए लेकिन फिर सदन में आ कर आसन के सामने पहुंच गए और मांग करने लगे कि उनकी नेता को बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। कुरियन तथा विपक्षी सदस्यों के कहने पर बसपा सदस्य अपने स्थानों पर लौट गए।
इससे पहले, बैठक शुरू होने पर उप सभापति पीजे कुरियन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके तत्काल पश्चात अन्नाद्रमुक सदस्य तमिलनाडु के किसानों का मुद्दा उठाते हुए आसन के समक्ष आ गए। मायावती सहित अन्य विपक्षी सदस्यों ने भी अपने अपने मुद्दे उठाने का प्रयास किया। कुरियन ने अन्नाद्रमुक सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने की अपील करते हुए कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि विपक्षी सदस्य अपने-अपने मुद्दों को लेकर उद्वेलित हैं। मैं एक-एक कर सबकी बात सुनूंगा। लेकिन सदस्य भी एक-एक कर ही अपने मुद्दे उठाएं।’’ कुरियन ने कहा कि सबसे पहले मायावती ने अपना मुद्दा उठाया है, इसलिए वह पहले अपनी बात रखें। लेकिन उन्हें अपनी बात तीन मिनट में रखनी होगी।
इस पर मायावती ने विरोध जताते हुए कहा कि यह अत्यंत गंभीर मुद्दा है और वह तीन मिनट में अपनी बात पूरी नहीं कर पाएंगी। मायावती ने कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत नोटिस दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक गांव में हाल ही में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने सुनियोजित तरीके से इसे अंजाम दिया और फिर इसे जातीय हिंसा का रूप दे दिया। जब बसपा प्रमुख अपनी बात रख रही थीं तब कुरियन ने कहा कि तीन मिनट हो चुके हैं। इस पर मायावती ने कहा कि अभी उनकी बात पूरी नहीं हुई है। ‘‘मैंने नियम 267 के तहत नोटिस दिया है जिस पर बोल रही हूं। यह शून्यकाल नहीं है। मुझे अपनी बात रखने दें।’’
अपनी बात पूरी करने के लिए कहे जाने पर जब मायावती ने नाराजगी जाहिर करते हुए इस्तीफा देने की बात कही और सदन से चली गईं तब संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मायावती पर आसन को चुनौती देने का आरोप लगाया। उन्होंने और भाजपा के अन्य सदस्यों ने मांग की कि मायावती को सदन से माफी मांगनी चाहिए। बसपा सदस्यों ने इस पर विरोध जताया। भाजपा सदस्यों ने मायावती से माफी की मांग को लेकर नारे भी लगाए।

Parliament highlights: Both houses adjourned, Mayawati says will quit for not allowing her to speak on Dalit atrocities

मायावती को लेकर बोले मुख्तार अंसारी

बहुजन समाज पार्टी के विधायक मुख्तार अंसारी ने आज पार्टी की मुखिया मायावती के पक्ष में जोरदार बयान दिया। लखनऊ में आज विधानसभा की कार्यवाही में विपक्ष के बहिष्कार के बीच में मुख्तार अंसारी ने साफ कहा कि लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।  माफिया से राजनीति का सफर करने वाले मुख्तार अंसारी मऊ से विधायक हैं। मुख्तार ने कहा कि बसपा मुखिया मायावती को आज राज्यसभा में बोलने से रोकने का प्रयास लोकतंत्र की हत्या है। राज्यसभा सदस्य मायावती को सदन में न बोलने देना लोकतंत्र की हत्या है। उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा ले रहे बसपा विधायक मुख्तार अंसारी ने कहा है कि सदन में नहीं बोलने देना, लोकतंत्र की हत्या है। मुख्तार ने कहा कि विपक्ष के मुंह पर ताला लगाने से लोकतंत्र कमजोर होगा। समाजवादी पार्टी के एमएलसी उदयवीर सिंह ने भी मायावती का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें बोलने नहीं देने की घटना लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा की पीठ के साथ ही सरकार को मामले का संज्ञान लेना चाहिए। सरकार आती-जाती रहती है, विपक्ष का सम्मान होना चाहिए। किसी भी दल से विपक्ष में बोलने का हक नहीं छीना जा सकता।