Poster Boys Movie Review
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पोस्‍टर बॉयज

रेटिंग: 3.5/5

कास्‍ट: बॉबी देओल, सनी देओल, श्रेयष तलपडे, सोनाली कुलकर्णी

डायरेक्‍टर: श्रेयष तलपडे

समय: 2 घंटे 11 मिनट

जॉनर: ड्रामा

लैंग्‍वेज: हिंदी

समीक्षक: विपिन तिवारी (बापू )

काफी समय बाद सनी और बॉबी देओल आपको पोस्टर ब्यॉज (Poster Boys) के जरिए बड़े पर्दे पर देखने को मिलेंगे। यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित मराठी फिल्म फिल्म ‘पोश्टर बॉयज़’ का ही हिंदी रीमेक है। इस फिल्म में श्रेयस तलपड़े ने एक्टिंग के साथ ही डायरेक्शन का काम भी किया है। फिल्म की कहानी उत्तर भारत के एक गांव पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह तीन लोगों की फोटो गलती से एक पोस्टर पर छप जाती है जिसमें वह पुरुष नसबंदी का विज्ञापन कर रहे हैं। सरकार की एक गलती की वजह से तीन लोगों की जिदंगी किस तरह से बदल जाती है, यही फिल्म में रोचक तरीके से दिखाया गया है।

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फिल्म की कहानी जमघेटी नामक गांव पर आधारित है जहां रिटायर्ड अफसर जगावर चौधरी (सनी देओल), स्कूल मास्टर विनय शर्मा (बॉबी देओल) और क्रेडिट कार्ड कंपनी का वसूली करने वाला गुंडा अर्जुन सिंह (श्रेयस तलपड़े) रहते हैं। इन तीनों की फोटो पुरुष नसबंदी का विज्ञापन करने वाले पोस्टर पर गलती से छप जाती है। तीनों अपने परिवार को समझाने की कोशिश करते हैं लेकिन कोई उनकी बात नहीं मानता। इस घटना के बाद इन तीनों किरदारों में से एक की शादी टूट जाती है और दूसरे की पहले से तय शादी कैंसल हो जाती है। इसके बाद तीनों सिस्टम से लड़ने का निर्णय लेते हैं। ये तीनों ही पीड़ित पुरुष इस बात की जांच करने में जुट जाते हैं कि आखिर उनकी तस्वीर पोस्टर पर कैसे छपी। इस दौरान फिल्म में प्रशासन विसंगतियां सामने आती हैं।

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यह एक आम आदमी की कहानी है जो आसामान्य परिस्थिति में फंस जाते हैं और उससे निपटने की कोशिश करते हैं। तीनों अपनी बेगुनाही को साबित करने की कोशिश करते बेशक प्रभावहीन लगें लेकिन उनके ट्रामा से आप खुद को निश्चित तौर पर कनेक्ट कर पाएंगे। बॉलीवुड कॉमेडी को फॉलो ना करते हुए तलपड़े ने अपेन सब्जेक्ट को काफी गंभीरता से विचार करने वाला बनाया है। फिल्म के लेखक को क्रेडिट देना चाहिए जिसने की हिंदी रीमेक में स्थानीय भाषा को डाला है।

पोस्टर बॉयज़ (Poster Boys) एक कसी हुई स्क्रिप्ट है और ये नज़र आता है कि श्रेयस ने काफी मेहनत की है’। फ़िल्म के संवादों पर किरदार के हिसाब से विशेष मेहनत की गई है यह भी साफ़ दिखता है! अपनी डेब्यू फ़िल्म के हिसाब से श्रेयस सफल नजर आते हैं। समय और अनुभव के साथ-साथ उनके क्राफ्ट में और सुधार होगा यह उम्मीद की जा सकती है’।

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पोस्टर बॉयज फिल्म को लिखने वाले समीर पाटिल ने उत्तरी भारत के परिवेश को बेहतरीन ढंग से दर्शाया है और स्थानीयता को शानदार तरीके से पेश किया है, इसके लिए उन्हें पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए। हालांकि इससे कोई बड़ा बदलाव होने की गारंटी नहीं है क्योंकि हम सांस्कृतिक रूप से बेहद जजमेंटल और अदूरदर्शी हैं। डायलॉग राइटर परितोष पेंटर ने कलाकारों के हिसाब से डायलॉग लिखकर बेहतरीन काम किया है।

बहरहाल, ‘पोस्टर बॉयज़’ एक मनोरंजक फ़िल्म है जिसे देखते हुए आप अपने ठहाके रोक नहीं पाएंगे! फ़िल्म के सब्जेक्ट को देखते हुए अगर यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि श्रेयस ने अपनी आधी ज़ंग सनी और बॉबी देओल की कास्टिंग कर के ही जीत ली है। अभिनय की अगर बात की जाए तो सनी देओल अपने इमेज से बाहर जाकर एक अलग अवतार में नज़र आते हैं, जिसमें वह सफल भी हुए हैं। बॉबी देओल पहले भी कॉमेडी कर चुके हैं लेकिन, इसमें वह एक अलग अंदाज़ में नज़र आते हैं। श्रेयस एक अभिनेता के तौर पर फ़िल्म को बांधे रखते हैं। कलाकारों की इस तिकड़ी ने दर्शकों पर अपनी पकड़ बना कर रखी है।