लखनऊ। अयोध्या में बाबरी मस्जिद और रामलला के मन्दिर विवाद को हल करने के लिए शिया वक्फ बोर्ड (Shia Wakf Board) ने एक सुझाव दिया है। बोर्ड के मसौदे के मुताबिक विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाए और मस्जिद लखनऊ में बनाई जाए। इस मस्जिद को किसी राज या शासक के नाम पर रखने के बजाए मस्जिद-ए-अमन नाम रखा जाये।

Temple built in Ayodhya, then built mosque in Lucknow: Shia Wakf Board
Temple built in Ayodhya, then built mosque in Lucknow: Shia Wakf Board

बता दें कि पिछले कुछ समय से शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी अयोध्या विवाद का हल निकालने के लिए काफी सक्रिय दिख रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने श्रीश्री रविशंकर के अलावा विवाद से जुड़े कई पक्षकारों से बात की थी। अब उन्होंने एक मसौदा तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि विवादित जमीन पर भगवान श्रीराम का मंदिर बने ताकि हिन्दू और मुसलमानों के बीच का विवाद हमेशा के लिए खत्म हो और देश में अमन कायम हो सके।

शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि इस मसौदे के तहत मस्जिद अयोध्या में न बनाई जाए, बल्कि उसकी जगह लखनऊ में बनाई जाए। इसके लिए पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद में घंटा घर के सामने शिया वक्फ बोर्ड की जमीन है, जिस पर मस्जिद बनाई जाए और इसका नाम किसी मुस्लिम राजा या शासक के नाम पर न होकर मस्जिद-ए-अमन रखा जाए।

बोर्ड ने अयोध्या के विवादित मामले का फार्मूला 18 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट में जमा करा दिया। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के इस मसौदे पर दस्तखत करने वालों में दिगंबर अखाड़े के सुरेश दास, हनुमान गढ़ी के धर्मदास, निर्मोही अखाड़े के भास्कर दास इसके अलावा राम विलास वेदांती, गोपालदास और नरेंद्र गिरी ने भी समर्थन किया है।

बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि हमने अयोध्या विवाद के हल का मसौदा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है। ये मसौदा तमाम लोगों से बातचीत के बाद तैयार किया गया है, और इस पर सभी सहमत हैं। रिजवी ने कहा कि हिंदू और शिया इस पर सहमत है, सुन्नी वक्फ बोर्ड का इससे कोई लेना देना नहीं है। वो भी अदालत में हैं हम भी अदालत में हैं कोर्ट फैसला करेगा।

उन्होंने कहा कि अयोध्या की बजाए हमने लखनऊ में इसलिए इसे प्रस्तावित किया है क्योंकि पुरानी लखनऊ मे घंटाघर के सामने बड़ी जमीन मौजूद है। यहां शिया आबादी भी काफी है और विवादों से दूर है इसलिए हमारा फॉर्मूला यही है। उधर इस मसौदे पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड सहमत नहीं है। बोर्ड ने कहा है कि शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड अयोध्या मामले में पार्टी नहीं है, लिहाजा उसका मसौदा कोई मायने नहीं रखता है।