लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल (Governor) राम नाईक की अध्यक्षता में शनिवार को कांस्टीट्यूशन क्लब, दिल्ली में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल के विधिक परामर्शदाता एस.एस. उपाध्याय एवं उनकी पुत्री सोनल उपाध्याय द्वारा लिखी गयी विधि पुस्तक ‘यूनिवर्सिटी लॉ इन इंडिया’ (University Law in India) का विमोचन किया गया।

The Governor released the book 'University Law in India'
The Governor released the book ‘University Law in India’

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ थे तथा जबलपुर विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश के कुलपति प्रोफेसर कपिलदेव मिश्रा मानद अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर तथा उच्चतम न्यायालय के अधिवक्तागण, कई पूर्व व वर्तमान न्यायाधीशगण एवं उच्च शिक्षा तथा अकादमिक जगत के कई लोग उपस्थित थे।

शनिवार को ही उत्तर प्रदेश के राज्यपाल (Governor) राम नाईक के साथ पुस्तक के लेखक एसएस उपाध्याय एवं सोनल उपाध्याय ने पुस्तक की एक प्रति राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द को भी भेंट की।

इस अवसर पर राज्यपाल (Governor) राम नाईक ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों आदि में समय-समय पर शिक्षकों, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों के बीच उत्पन्न होने वाले समस्त प्रकार के विवादों के विधिसम्मत समाधान की दृष्टि से यह पुस्तक कुलपतियों, कुलसचिवों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं तथा विश्वविद्यालयों के कुलाधिपतियों/कुलाध्यक्षों के लिए अत्यन्त उपयोगी है।

विश्वविद्यालयों और उनसे सम्बद्ध शिक्षण संस्थानों में समय-समय पर उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के विधिक विवादों का विधिसम्मत समाधान करने हेतु चॅूंकि अब तक कोई विधि पुस्तक अथवा विस्तृत कमेंट्री उपलब्ध नही थी जिससे ऐसे मामलों में विश्वविद्यालयों के सम्बन्धित अधिकारियों, प्रशासनिक परिषदों तथा कॉलेज प्रबन्धनों को समुचित निर्णय ले पाने में प्रायः कठिनाई होती थी। इस पुस्तक के आ जाने से उच्च शिक्षा जगत की एक बड़ी आवश्यकता की पूर्ति हुई है।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राम नाईक एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप बाबासाहेब भोसले, उच्चतम न्यायालय में भारत सरकार के एटार्नी जनरल ऑफ इण्डिया के.के. वेणुगोपाल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली, असम एवं केरल विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने पुस्तक में प्राक्कथन लिखे हैं।

पुस्तक में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों, प्राइवेट विश्वविद्यालयों, डीम्ड एवं मुक्त विश्वविद्यालयों, कृषि, प्रोद्यौगिकी एवं चिकित्सा विश्वविद्यालयों तथा उनसे सम्बन्धित कॉलेजों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों के समस्त प्रकार के विधिक विषयों को सम्मिलित किया गया है।

इस पुस्तक में उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के कुल 2,402 निर्णयों को नजीरों के रूप में उद्धृत किया गया है जो विश्वविद्यालयों और उनसे सम्बद्ध कॉलेजों और अन्य संस्थानों में उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के विधिक विवादों में निर्णय करने की दृष्टि से बहुत सहायक होंगे।

पुस्तक में अल्पसंख्यक विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को संविधान और विधियों के अन्तर्गत मिले विशेषाधिकार को भी विस्तार से समझाया गया है। कॉलेजों और उच्च शिक्षा के अन्य संस्थानों में समय-समय पर उत्पन्न होने वाले प्रबन्धकीय विवादों, उनके प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के सेवा सम्बन्धी विवादों के विधिक समाधान पर पुस्तक में विस्तार से चर्चा की गयी है।

’यूनिवर्सिटी लॉ इन इण्डिया’ (University Law in India) की विषयवस्तु के बारे में पुस्तक की सह-लेखिका सोनल उपाध्याय द्वारा बताया गया कि पुस्तक में कुलाधिपतियों और कुलपतियों के अधिकार, कुलपतियों और शिक्षकों के चयन और नियुक्तियों से सम्बन्धित विधियों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग जैसी केन्द्रीय संस्थाओं के अधिकार और कत्र्तव्य, महाविद्यालयों की सम्बद्धता सम्बन्धी विधियों, शिक्षकों की प्रोन्नति एवं परस्पर ज्येष्ठता के निर्धारण सम्बन्धी विधियों, अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की विधियों, विद्यार्थियों के प्रवेश शुल्क, कैपिटेशन शुल्क, परीक्षा, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, परीक्षाओं में अनुचित साधनों के प्रयोग सम्बन्धी विधियों, छात्र-संघों के चुनाव, रैगिंग, विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों से छात्रों के निष्कासन एवं अनुशासनहीनता सम्बन्धी विधियों पर विस्तार से चर्चा की गयी है और इन विषयों पर उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों में समय-समय पर दिये गये विधिक दिशा-निर्देशों का पर्याप्त स्पष्टता के साथ उल्लेख किया गया है।

पुस्तक का प्रकाशन विख्यात विधि पुस्तकों के प्रकाशक कम्पनी ’लेक्सिस नेक्सिस’ द्वारा किया गया है। लेक्सिस नेक्सिस का मुख्यालय फिलीपींस की राजधानी मनीला तथा अमेरिका के न्यूयार्क में है जिसका भारत में कार्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में है।

पुस्तक ’अमेजन’ नामक विश्वस्तरीय ऑनलाईन व्यवसाय करने वाली कम्पनी की वेबसाइट पर भी क्रय करने के लिए उपलब्ध है। देश के समस्त राज्यों की राजधानियों एवं अन्य प्रमुख शहरों में विधि पुस्तक विक्रेताओं के यहॉं भी पुस्तक ग्राहकों के लिए सुलभ है।