नई दिल्ली । (yes bank) ने लगातार दूसरे साल अपने खाते में हृक्क्र कम दिखाया है. आरबीआई के मुताबिक बैंक ने 2016-17 में 6355 करोड़ रुपए का एनपीए छुपाया। आरबीआई के आकलन के मुताबिक पिछले साल ग्रॉस एनपीए 8374 करोड़ रुपए था, जबकि बैंक ने सिर्फ 2018 करोड़ दिखाए।

वास्तव में जितना एनपीए था, बैंक ने उसका सिर्फ एक चौथाई दिखाया। ग्रॉस एनपीए में दोगुनी बढ़ोतरी गुरुवार को घोषित नतीजों में बैंक ने ग्रॉस एनपीए में दोगुनी बढ़ोतरी की जानकारी दी. सितंबर तिमाही में यह कुल कर्ज का 1.82 प्रतिशत हो गया, जबकि जून तिमाही में 0.92 प्रतिशत और सितंबर 2016 में 0.39 प्रतिशत था। रकम के लिहाज से एनबीए 2720 करोड़ रुपए है, जो जून तिमाही में 1364 करोड़ रुपए था।

YES Bank
YES Bank

बैंक को 447 करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग करनी पड़ी है। क्या है बैंक मैनेजमेंट का दावा नतीजे घोषत करने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैंक मैनेजमेंट ने दावा किया कि 6355 करोड़ में से 47 प्रतिशत एनपीए छह माह में अपग्रेड हो गया है। इसके अलावा 27 प्रतिशत रकम का भुगतान हो गया और 7 प्रतिशत एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को बेचा गया। इसलिए सिर्फ बाकी बची 19 प्रतिशत रकम को सितंबर तिमाही में एनपीए में रखा गया है।

बैंक के एमडी और सीईओ राणा कपूर ने कहा कि ये इंफ्रस्ट्रक्चर सेक्टर के लिए 19 खातों के एनपीए हैं. उन्होंने इसे एसेट चलिटी में अस्थायी नुकसान बताया। उन्होंने कहा कि सितंबर तिमाही के खातों में पूरे एनपीए की प्रोविजनिंग कर ली गई। 2015-16 में भी सिर्फ 15 प्रतिशत एनपीए दिखाया था। आरबीआई और यस बैंक के एनबीए आकलन में लगातार दूसरे साल अंतर आया है।

2015-16 में बैंक ने 749 करोड़ का एनपीए घोषित किया था, जबकि रिजर्व बैंक के अनुसार यह रकम 4925 करोड़ रुपए थी यानी बैंक द्वारा घोषित एनपीए का 6 गुना। मुनाफा 25 प्रतिशत बढ़कर 1002 करोड़ रुपए हुआ। सितंबर तिमाही में यस बैंक का मुनाफा 25 प्रतिशत बढ़कर 1002 करोड़ हो गया है। ब्याज से होने वाली आय 33.5 प्रतिशत ज्यादा, 1885 करोड़ रही। नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गया. रेवेन्यू 6,049 करोड़ रुपए रहा, जो सितंबर 2016 की तिमाही में 4962 करोड़ था।